उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: NDA के सी.पी. राधाकृष्णन की शानदार जीत, 452 वोटों से बने भारत के नए उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: NDA के सी.पी. राधाकृष्णन की शानदार जीत, 452 वोटों से बने भारत के नए उपराष्ट्रपति
भारत के 17वें उपराष्ट्रपति के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल कर ली। संसद भवन में रात 10:30 बजे घोषित नतीजों के अनुसार, राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार जस्टिस (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को 317 वोट प्राप्त हुए। कुल 769 वोट पड़े, जिसमें 13 सांसद गैरहाजिर रहे। जीत के लिए जरूरी 385 वोटों का कोटा राधाकृष्णन ने आसानी से पार किया।
मतगणना का रोमांच
मतगणना शाम 6 बजे शुरू हुई और एकल संक्रमणीय आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चली। राज्यसभा महासचिव पी.सी. मोदी के नेतृत्व में चली इस प्रक्रिया में गुप्त मतदान के कारण अंतिम समय तक सस्पेंस बना रहा। NDA के मजबूत संख्या बल (425 सांसदों का समर्थन, जिसमें YSRCP के 11 वोट शामिल) ने जीत सुनिश्चित की। इंडिया ब्लॉक के 324 वोटों के बावजूद क्रॉस वोटिंग की उम्मीदें धराशायी हो गईं। बीजू जनता दल (7 सांसद), भारत राष्ट्र समिति (4), और शिरोमणि अकाली दल (2) की गैरहाजिरी ने विपक्ष को और कमजोर किया।
राधाकृष्णन का प्रोफाइल और प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के कोयंबटूर से BJP के वरिष्ठ नेता और वर्तमान महाराष्ट्र राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन (78 वर्ष) ने जीत के बाद कहा, “यह जीत NDA की एकजुटता और देश की प्रगति का प्रतीक है। मैं संविधान की रक्षा के लिए समर्पित रहूंगा।” वे 1998-99 में कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं और झारखंड, तेलंगाना व महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में सेवा दे चुके हैं। NDA ने दक्षिण भारत में अपनी मजबूती दिखाने के लिए उन्हें चुना था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें 11 सितंबर को शपथ दिलाएंगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
इंडिया ब्लॉक के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “हमारी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, लेकिन लोकतंत्र की जीत हुई।” राहुल गांधी ने X पर लिखा, “संघर्ष जारी रहेगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले NDA की मजबूती का संकेत है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को इस्तीफे के बाद यह चुनाव हुआ था।
चुनाव का महत्व
यह चुनाव दक्षिण भारत के दो दिग्गजों के बीच था, जिसने क्षेत्रीय राजनीति को भी प्रभावित किया। NDA की रणनीति—सांसदों की मीटिंग्स और एकजुटता—कामयाब रही। अब राधाकृष्णन राज्यसभा सभापति के रूप में संसद की कार्यवाही संभालेंगे।
