देहरादून को असुरक्षित बताने वाली रिपोर्ट भ्रामक, पुलिस ने किया खुलासा
देहरादून: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की हालिया ‘नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (NARI) 2025’ रिपोर्ट में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों की सूची में शामिल करने पर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट में देहरादून का स्कोर 60.6% बताया गया, जो राष्ट्रीय औसत 64.6% से कम है, और इसे देश के 10 सबसे असुरक्षित शहरों में गिना गया। लेकिन देहरादून पुलिस ने इस रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए इसका खुलासा किया है। एसएसपी अजय सिंह ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रिपोर्ट के आंकड़े पुराने और गलत व्याख्या पर आधारित हैं, जबकि वास्तविकता में शहर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून में 26% महिलाओं ने स्थानीय लोगों के रवैये को असुरक्षा का कारण बताया, 18% ने अपराध दर और 11% ने सुनसान इलाकों को जिम्मेदार ठहराया। छेड़छाड़ की घटनाओं में गाली-गलौज सबसे आम पाई गई, जबकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 50% महिलाओं ने उत्पीड़न का अनुभव साझा किया। केवल 24% महिलाओं को सुरक्षा ढांचे पर भरोसा है। इस रिपोर्ट पर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दशमी ने कहा कि यह बीजेपी के महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलती है। उन्होंने सीसीटीवी बढ़ाने, स्ट्रीट लाइट लगाने और निर्भया जैसी योजनाओं की मांग की।
एसएसपी अजय सिंह ने खुलासा करते हुए बताया कि रिपोर्ट 2024 के मध्य तक के सर्वे पर आधारित है, जिसमें देहरादून के 31 शहरों का मूल्यांकन किया गया। लेकिन पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अपराध दर में 15% कमी आई है। महिलाओं से संबंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई, 100% चार्जशीट दाखिल और विशेष महिला हेल्पलाइन की स्थापना से स्थिति सुधरी है। उन्होंने कहा कि नागालैंड की कोहिमा (82.9% स्कोर) सबसे सुरक्षित बताई गई, लेकिन देहरादून में 59% महिलाओं ने पुलिस पर भरोसा जताया है। पुलिस ने रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कहा कि यह भ्रामक है क्योंकि इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के आंकड़े शामिल नहीं हैं और सर्वे सैंपल छोटा था।
सरकार ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के लिए ‘मिशन शक्ति’ योजना के तहत 500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद राजनीतिक रंग ले सकता है, लेकिन पुलिस का खुलासा रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। एसएसपी ने आश्वासन दिया कि शहर को और सुरक्षित बनाने के लिए पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी। यह मामला अब राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां विपक्ष और सरकार के बीच बहस तेज हो रही है।
