भारत-जापान की दोस्ती किन सेक्टर्स में बढ़ाएगी सहयोग, जानिए
नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच दोस्ती हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन अब यह रिश्ता और गहरा हो रहा है। 29 अगस्त 2025 को टोक्यो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की बैठक में कई बड़े फैसले हुए। दोनों देशों ने अगले दशक के लिए एक रोडमैप बनाया है, जिसमें आठ मुख्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। यह ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप’ को नया आयाम देगा। पीएम मोदी ने कहा, “जापान की टेक्नोलॉजी और भारत की स्केल मिलकर एशियन सदी को स्थिरता, विकास और समृद्धि देंगे।” जापान अगले 10 साल में भारत में 10 ट्रिलियन येन (करीब 67 अरब डॉलर) का निवेश करेगा, जो पहले के 5 ट्रिलियन येन के टारगेट से दोगुना है।
सबसे पहले, इकोनॉमिक सिक्योरिटी में सहयोग बढ़ेगा। दोनों देश सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे। जापानी कंपनी रेनेसास ने गुजरात के सानंद में OSAT प्लांट लगाया है, और आईआईटी हैदराबाद के साथ एमओयू साइन किए हैं। मिनरल रिसोर्सेज पर नया एमओयू हुआ है, जिसमें खनन, प्रोसेसिंग और डीप-सी माइनिंग पर जानकारी शेयर होगी। टोयोटा त्सुशो का आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ रिफाइनिंग प्रोजेक्ट सप्लाई चेन को स्थिर बनाएगा।
दूसरा, मोबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट में जापान की शिंकानसेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप के तहत पोर्ट्स, एविएशन, शिपबिल्डिंग और बैटरी, रोबोटिक्स पर काम होगा। जापान की ODA से दिल्ली मेट्रो जैसी परियोजनाएं पहले ही सफल हैं, अब इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे चेन्नई-बेंगलुरु पर फोकस।
तीसरा, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन। AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक और स्पेस में पार्टनरशिप बढ़ेगी। इंडिया-जापान AI कोऑपरेशन इनिशिएटिव लॉन्च हुआ, जिसमें जॉइंट रिसर्च, यूनिवर्सिटी-कंपनी लिंकेज और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स पर काम होगा। डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 रिन्यू हुई, जिसमें साइबर सिक्योरिटी, ओपन RAN (5G के लिए) और स्टार्टअप्स शामिल। एनईसी और रिलायंस जियो का 5G पार्टनरशिप एक उदाहरण है।
चौथा, इकोलॉजिकल सस्टेनेबिलिटी और क्लीन एनर्जी। क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन, अमोनिया और LNG पर एनर्जी मिनिस्टीरियल डायलॉग होगा। जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म पर एमओयू साइन हुआ, जो कार्बन न्यूट्रैलिटी के लिए है। अदानी पावर के मुंद्रा प्लांट में अमोनिया को-फायरिंग डेमो होगा। भारत का 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी टारगेट 2030 तक पूरा करने में जापान मदद करेगा।
पांचवां, हेल्थ सेक्टर। फार्मा और बायोटेक में कोऑपरेशन से दवाओं का उत्पादन बढ़ेगा। वैक्सीन डेवलपमेंट और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी पर फोकस, ताकि हेल्थकेयर सबके लिए पहुंचे।
छठा, सिक्योरिटी और डिफेंस। 2008 के जॉइंट डिक्लेरेशन को अपडेट किया जाएगा। साइबर सिक्योरिटी, मैरिटाइम अवेयरनेस और मालाबार एक्सरसाइज जैसे जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज बढ़ेंगे। यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटेना (UNICORN) टेक्नोलॉजी का को-प्रोडक्शन पहला कदम है। इंडो-पैसिफिक में फ्री एंड ओपन स्ट्रेटजी पर सहमति।
सातवां, पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज। अगले 5 साल में 5 लाख लोगों का एक्सचेंज, जिसमें 50,000 भारतीय जापान जाएंगे। लोटस प्रोग्राम, साकुरा साइंस और MEXT स्कॉलरशिप्स बढ़ेंगी। स्टेट-प्रेफेक्टचर पार्टनरशिप इनिशिएटिव से राज्यों-प्रांतों के बीच ट्रेड, टूरिज्म, स्किल्स पर काम।
आठवां, कल्चरल और एजुकेशनल कोऑपरेशन। बौद्ध हेरिटेज, जापानी लैंग्वेज क्लासेस, सिस्टर सिटी प्रोजेक्ट्स (जैसे कोबे-अहमदाबाद) और टूरिज्म को बढ़ावा। जापान फाउंडेशन के इवेंट्स से कल्चरल एक्सचेंज मजबूत होगा।
ये कदम न सिर्फ आर्थिक विकास देंगे, बल्कि इंडो-पैसिफिक में स्थिरता भी लाएंगे। चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा के बीच यह पार्टनरशिप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। 150 से ज्यादा एमओयू साइन हुए, जिनकी वैल्यू 13 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत-जापान दोस्ती अब ‘मेक इन इंडिया’ और जापान की इनोवेशन को जोड़कर वैश्विक लीडर बनेगी।
