राजनीति

राजस्थान में लागू होगा ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’: पंचायत और शहरी निकाय चुनाव होंगे एक साथ

राजस्थान में लागू होगा ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’: पंचायत और शहरी निकाय चुनाव होंगे एक साथ

जयपुर, 22 अगस्त 2025: राजस्थान सरकार ने ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को एक साथ कराने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि नवंबर 2025 में दोनों चुनाव एक साथ होंगे। इस कदम का उद्देश्य चुनावी खर्च को कम करना, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और विकास कार्यों में बाधा को रोकना है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर राजस्थान सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के बीच तनातनी देखने को मिल रही है। SEC के आयुक्त मधुकर गुप्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जिन पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है या होने वाला है, उनके लिए दो महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। गुप्ता ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ लागू करना संभव नहीं है।

नगरीय विकास और स्वायत्त शासन (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि सरकार ने परिसीमन का कार्य पूरा कर लिया है और अगले एक-दो दिनों या अधिकतम एक सप्ताह में अधिसूचना जारी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार को फरवरी 2026 तक का समय दिया है, लेकिन सरकार दिसंबर 2025 में ही चुनाव कराने के पक्ष में है। खर्रा ने माना कि पंचायती राज संस्थाओं के अलग-अलग कार्यकाल (2026 और 2027) के कारण एक साथ चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण है।

इस बीच, विपक्ष ने इस कदम को असंवैधानिक करार दिया है। कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने X पर पोस्ट कर कहा कि BJP सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की आड़ में पंचायती राज व्यवस्था की शक्तियों को छीन रही है और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने भी स्थगित चुनावों को लोकतंत्र के लिए अस्वस्थ बताया, क्योंकि पंचायतें स्थानीय शासन और विकेंद्रीकरण का आधार हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर जनहित याचिकाएं भी दायर की गई हैं, जिनमें सरकार के 16 जनवरी 2025 के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसमें 6,759 ग्राम पंचायतों के कार्यकाल को बढ़ाकर सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 243E और 243K का उल्लंघन है।

सरकार का तर्क है कि ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो शहरी और ग्रामीण निकायों के ढांचे में बदलाव और जनसंख्या वृद्धि के आधार पर व्यवहार्यता का अध्ययन कर रही है। यह कदम राजस्थान को देश में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की दिशा में एक मॉडल राज्य बनाने की कोशिश है।

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