Saturday, November 7, 2026
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बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी के बयान से गरमाई सियासत: रोने के दावे पर भाजपा ने ‘एंटी-हिंदू’ बताकर साधा निशाना

बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी के बयान से गरमाई सियासत: रोने के दावे पर भाजपा ने ‘एंटी-हिंदू’ बताकर साधा निशाना

​नई दिल्ली:

​वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस पर दिए गए एक बयान के बाद देश की राजनीति में नया घमासान शुरू हो गया है। अपनी आगामी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ के प्रमोशन के दौरान एक साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने कहा कि जब उन्होंने टीवी पर बाबरी मस्जिद को ढहते देखा, तो वह रो पड़ी थीं। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ‘प्रो-बाबर’ और ‘एंटी-हिंदू’ होने का आरोप लगाया है।

​’सेक्यूलर भारत के लिए लंबी लड़ाई का हुआ अहसास’

​’द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया गांधी ने साक्षात्कार में कहा कि 6 दिसंबर 1992 की घटना को देखते ही उन्हें समझ आ गया था कि देश एक कठिन दौर में प्रवेश कर रहा है और महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू व उनके सहयोगियों द्वारा बनाए गए धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के आदर्शों की रक्षा के लिए अब एक लंबा संघर्ष करना होगा।

​इसके साथ ही सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी की कमियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने माना कि कांग्रेस की लापरवाही और ‘सब कुछ अपने हाल पर छोड़ देने’ वाले रवैये ने भी कुछ हद तक भाजपा और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ने में मदद की।

​भाजपा का पलटवार: ‘सोनिया गांधी बहाती हैं बाबरी और बाटला हाउस पर आंसू’

​सोनिया गांधी की टिप्पणी पर केंद्रीय सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने हमलावर रुख अपनाया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर वीडियो जारी कर सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा:

​वोट बैंक की राजनीति का आरोप: प्रदीप भंडारी ने कहा, “सोनिया गांधी बाबरी मस्जिद के लिए आंसू बहाती हैं और बाटला हाउस एनकाउंटर के लिए आंसू बहाती हैं। यह साबित करता है कि कांग्रेस प्रो-बाबर (बाबर समर्थक) और भगवान राम के खिलाफ है।”

​उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की इस तरह की तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति को जनता लगातार खारिज करती रहेगी।

​6 दिसंबर 1992 का ऐतिहासिक घटनाक्रम

​उल्लेखनीय है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को कारसेवकों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। उस समय केंद्र में पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी, जबकि उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश देने से मना कर दिया था, जिसके बाद यूपी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था।

​इसके बाद के दशकों में राम जन्मभूमि का मुद्दा अदालतों में चला और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हुआ।

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