Saturday, November 7, 2026
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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ISI का नया दांव: आतंकी संगठनों के बड़े अड्डों की जगह बनाए छोटे व गुप्त ट्रेनिंग सेंटर

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ISI का नया दांव: आतंकी संगठनों के बड़े अड्डों की जगह बनाए छोटे व गुप्त ट्रेनिंग सेंटर

​नई दिल्ली:

​भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान स्थित आतंकी बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान के बाद वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के मुख्यालय और मुरीदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मुख्य प्रशिक्षण केंद्र के तबाह होने के बाद, अब किसी एक केंद्रीकृत ठिकाने के बजाय पाकिस्तान और पीओके के विभिन्न हिस्सों में कई छोटे व विकेंद्रीकृत प्रशिक्षण और संचालन केंद्र बनाए जा रहे हैं।

​तबाह अड्डों का पुनर्निर्माण केवल प्रतीकात्मक

​खुफिया एजेंसियों (IB) के इंटरसेप्ट्स के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहावलपुर और मुरीदके (लश्कर का गढ़) के साथ-साथ पीओके के कोटली स्थित हिजबुल मुजाहिदीन के ‘मार्कज राहील शहीद’ और सियालकोट के ‘महमूना जया’ शिविर का पुनर्निर्माण तेजी से कराया गया है। हालांकि, इन केंद्रों में गतिविधियां बेहद सीमित और न के बराबर रखी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पुनर्निर्माण केवल हताश आतंकियों के मनोबल को बनाए रखने और यह दिखाने के लिए किया गया है कि उनका नेटवर्क जीवित है। भविष्य में किसी भी बड़े आतंकी हमले की योजना इन प्रतीकात्मक मुख्यालयों से संचालित नहीं की जाएगी।

​नए ठिकाने और विकेंद्रीकृत नेटवर्क

​भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल बनाने के उद्देश्य से आईएसआई ने नई रणनीति तैयार की है:

​नए ट्रेनिंग सेंटर: इस्लामाबाद, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलकोट में कई छोटे-छोटे प्रशिक्षण और संचालन केंद्र विकसित किए गए हैं। प्रत्येक शहर में एक बड़ा केंद्र बनाने के बजाय 4-5 अलग-अलग सुविधाएं तैयार की गई हैं।

​सशस्त्र कैडरों का रोटेशन: आतंकियों को अब किसी एक ठिकाने पर लंबे समय तक ठहराने के बजाय लगातार अलग-अलग केंद्रों पर स्थानांतरित (रोटेट) किया जाएगा।

​कमांड सेंटर: इन संगठनों का मुख्य कमांड सेंटर खैबर पख्तूनख्वा (KP) में स्थापित किया गया है।

​ISI का सीधा नियंत्रण और आतंकी गुटों का विलय

​नई व्यवस्था के तहत जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन अब अलग-अलग काम करने के बजाय एक-दूसरे के साथ मिलकर संयुक्त रूप से हमलों की योजना बनाएंगे।

​हाफिज सईद, मसूद अजहर और सैयद सलाहुद्दीन जैसे शीर्ष आतंकी आकाओं की भूमिका केवल प्रतीकात्मक और वैचारिक नेतृत्व तक सीमित कर दी गई है। इन संगठनों के रोजमर्रा के कामकाज और सभी अभियानों की सीधी निगरानी अब आईएसआई के ब्रिगेडियर इकबाल और कर्नल ओवैज कर रहे हैं। इस नई रणनीति का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भारत भविष्य में किसी एक ठिकाने पर हमला भी करता है, तो नुकसान सीमित रहे और अन्य शिविरों से गतिविधियां जारी रखी जा सकें।

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