Saturday, November 7, 2026
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कर्नाटक पेट्रोल पंपों पर अधिक इथेनॉल मिलावट के दावे खारिज, केंद्र सरकार ने गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कर्नाटक पेट्रोल पंपों पर अधिक इथेनॉल मिलावट के दावे खारिज, केंद्र सरकार ने गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

​नई दिल्ली:

​केंद्र सरकार ने कर्नाटक के कुछ पेट्रोल पंपों पर तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिलाए जाने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई सैंपलिंग और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया है कि देशव्यापी गुणवत्ता निगरानी के तहत कर्नाटक में जांचे गए सभी 56 सैंपल तय E20 (20% इथेनॉल) मानकों पर पूरी तरह खरे उतरे हैं। तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने पुष्टि की है कि 26 से 31 प्रतिशत इथेनॉल मिलावट के दावे किसी भी वैधानिक या तकनीकी जांच से सिद्ध नहीं होते।

​राज्य की जांच प्रक्रिया और सैंपलिंग पर उठे गंभीर सवाल

​पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और ‘मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस 2024’ के तहत सैंपलिंग, सीलिंग और लैब टेस्टिंग की एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया तय है, जिसका अक्टूबर 2026 की जांच में पालन नहीं किया गया:

​प्रक्रियागत खामियां: राज्य द्वारा अक्टूबर में लिए गए सैंपल में तेल कंपनियों (OMCs) के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, निर्धारित सरकारी प्रयोगशालाओं के बजाय थर्ड-पार्टी लैब की रिपोर्ट पर निर्भरता जताई गई।

​तकनीकी अनियमितताएं: जारी प्रमाणपत्रों में मानक परीक्षण विधि और डाइल्यूशन प्रक्रिया की जानकारी अनुपस्थित थी। साथ ही, 26-31% इथेनॉल का दावा करने वाले सैंपलों की ‘डेंसिटी’ (घनत्व) रीडिंग में भी विसंगतियां पाई गईं।

​पारदर्शी जांच का अभाव: तेल कंपनियों को दोबारा जांच कराने (रिटेंशन सैंपल) का अवसर नहीं दिया गया, जिससे इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं हो सका।

​देशव्यापी 893 और कर्नाटक के सभी 56 सैंपल पाए गए मानक के अनुरूप

​मंत्रालय और ‘सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी’ (CHT) द्वारा देश के 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से 893 E20 ईंधन सैंपल लिए गए थे, जिनकी रिफाइनरी और OMC लैब में जांच की गई:

​राष्ट्रीय आंकड़ा: जांचे गए सभी 893 सैंपल निर्धारित 19% से 21% इथेनॉल सीमा के भीतर पाए गए।

​कर्नाटक का आंकड़ा: कर्नाटक से लिए गए सभी 56 सैंपल मानकों के अनुरूप रहे, जिनमें इथेनॉल की मात्रा 19% से 20% (औसत 19.30%) दर्ज की गई।

​मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि डिपो पर इथेनॉल ब्लेंडिंग पूरी तरह से स्वचालित (Automated) और कैलिब्रेटेड सिस्टम द्वारा की जाती है, न कि मैनुअल तरीके से। साथ ही, ओएमसी को अधिक इथेनॉल मिलाने से कोई वित्तीय लाभ नहीं होता, बल्कि अतिरिक्त खरीद से उनकी लागत ही बढ़ती है।

​1.01 लाख करोड़ रुपये के नुकसान के अनुमान को बताया अवैज्ञानिक

​राज्य द्वारा माइलेज और वाहन मरम्मत लागत के नाम पर 1.01 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान के दावों पर मंत्रालय ने कहा:

​वास्तविक आंकड़े: देश में 30 करोड़ से अधिक दोपहिया और 4 करोड़ चारपहिया वाहन पिछले 3 वर्षों से E20 पेट्रोल पर निर्बाध चल रहे हैं और वाहनों के खराब होने की कोई व्यापक शिकायत नहीं मिली है।

​माइलेज प्रभाव: ARAI और SIAM के अध्ययनों के अनुसार, E20 ईंधन से माइलेज में केवल 1 से 6 प्रतिशत तक का ही प्रभाव पड़ सकता है। पूरे वाहन समूह पर 10% माइलेज नुकसान का एकसमान अनुमान लगाना वैज्ञानिक रूप से गलत है।

​इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां

​इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2014-15 से 2025-26 (31 अक्टूबर 2026 तक) की मुख्य उपलब्धियां:

​विदेशी मुद्रा की बचत: 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक।

​कच्चे तेल का प्रतिस्थापन: 316 लाख मीट्रिक टन।

​कार्बन उत्सर्जन में कमी: 952 लाख मीट्रिक टन CO_2 कम।

​किसानों को लाभ: 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सीधा भुगतान।

​मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का मुख्य उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और किसानों की आय को मजबूती देना है। सरकार स्थापित गुणवत्ता तंत्र के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण ईंधन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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