गोकुल मिल्क यूनियन विवाद पर शिवसेना (UBT) का हमला: महायुति सरकार पर ‘सहकारी लोकतंत्र’ को कमजोर करने का आरोप
गोकुल मिल्क यूनियन विवाद पर शिवसेना (UBT) का हमला: महायुति सरकार पर ‘सहकारी लोकतंत्र’ को कमजोर करने का आरोप
मुंबई:
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शनिवार को महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर ‘सहकारी लोकतंत्र’ की हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (गोकुल मिल्क यूनियन) में गैर-आधिकारिक ‘विशेषज्ञ’ निदेशकों की नियुक्ति का प्रस्ताव मंजूर कर हालिया चुनावों के जनमत को बदलने की कोशिश की जा रही है।
चुनावों में हार के बाद नियमों में बदलाव का आरोप
संपादकीय के मुताबिक, कोल्हापुर के लगभग 5.5 लाख डेयरी किसानों की आर्थिक और राजनीतिक रीढ़ मानी जाने वाली ‘गोकुल’ के हालिया चुनाव में सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि महायुति समर्थित हसन मुश्रीफ के गुट को 12 सीटें मिली थीं। ठाकरे गुट का आरोप है कि चुनाव हारने के बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में सहकारी नियमों में बदलाव कर अतिरिक्त ‘विशेषज्ञ’ निदेशकों को नियुक्त करने का प्रावधान जोड़ दिया। इस कदम से 12 सीटों वाले अल्पसंख्यक गुट को 16 सदस्यों के बहुमत वाले सत्ताधारी गुट में बदल दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक तरीके से जीते 13 सदस्यों वाले बहुमत को दरकिनार कर दिया गया।
’सामना’ का तंज: कृष्ण सिर्फ माखन चुराते थे, भाजपाइयों ने पूरा ‘गोकुल’ ही लूट लिया
संपादकीय में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का उदाहरण देते हुए सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला गया। सामना में लिखा गया, “गोकुल में भगवान कृष्ण ‘माखन-चोर’ के रूप में प्रसिद्ध थे, वे दोस्तों के साथ मिलकर केवल माखन चुराया करते थे। लेकिन आज के भाजपाई चालबाजों ने तो पूरा ‘गोकुल’ ही लूट लिया है।” शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया कि इस पुनर्गठन के जरिए उन नेताओं को पीछे के दरवाजे से वापस लाया जा रहा है, जिन्हें कोल्हापुर के दुग्ध उत्पादकों ने चुनाव में पूरी तरह नकार दिया था।
सहकारी स्वायत्तता पर उठे सवाल
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस फैसले को लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि जो सरकार चुने हुए प्रतिनिधियों को अपना नेतृत्व चुनने का अधिकार नहीं देती, वह विश्वासघात कर रही है। पार्टी ने चेतावनी दी कि एक क्षेत्रीय दुग्ध संघ के चुनाव से शुरू हुआ यह विवाद अब महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता, बहुमत के शासन और जमीनी स्तर के लोकतंत्र की सुरक्षा की एक बड़ी कानूनी व राजनीतिक लड़ाई बन चुका है।

