फारूक अब्दुल्ला के बयान पर NDA का पलटवार, अनुच्छेद 370 और आतंकवाद का मुद्दा उठाकर घेरा
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर NDA का पलटवार, अनुच्छेद 370 और आतंकवाद का मुद्दा उठाकर घेरा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के बयान पर रविवार को एनडीए नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति, अनुच्छेद 370 को हटाने और केंद्र सरकार की नीतियों का हवाला देते हुए अब्दुल्ला पर निशाना साधा।
दिलीप घोष बोले- जम्मू-कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और वहां के लोग आतंकवाद के बजाय विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों के साथ जोड़कर विकास की दिशा में काम कर रही है।
फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए घोष ने उन पर पाकिस्तान के साथ हाथ मिलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को अलग रखकर राजनीति करने का दौर अब नहीं चलेगा। हालांकि, पाकिस्तान से संबंधों को लेकर लगाया गया यह आरोप दिलीप घोष का राजनीतिक बयान है।
ओपी राजभर ने अनुच्छेद 370 का किया जिक्र
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
राजभर ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले होने वाली हिंसा और खून-खराबे की घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेश दौरों के दौरान दिए जाने वाले शांति और दोस्ती के संदेश का भी उल्लेख किया।
फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र की चुप्पी पर उठाए थे सवाल
दरअसल, फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को उत्तर कश्मीर के बारामूला में पार्टी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीवित रखने के प्रयास क्षेत्र के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उनके इस बयान के बाद एनडीए नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों का हवाला देते हुए पलटवार किया।
इस बयानबाजी ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति, पाकिस्तान की भूमिका और कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीति को लेकर राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है।

