Sunday, October 25, 2026
लाइफ स्टाइल

साधारण सेल्फी से कैंसर के खतरे और जीवित रहने की संभावना का अनुमान? वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया एआई टूल

साधारण सेल्फी से कैंसर के खतरे और जीवित रहने की संभावना का अनुमान? वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया एआई टूल

​वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक ऐसा अभिनव टूल विकसित किया है, जो मोबाइल फोन से खींची गई एक साधारण सेल्फी के जरिए कैंसर मरीजों की सेहत और उनके जीवित रहने की संभावनाओं का आकलन करने में मदद कर सकता है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित मास जनरल ब्रिघम के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष 19 अक्टूबर को प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द लैंसेट डिजिटल हेल्थ’ में प्रकाशित हुए हैं।

​हालांकि, शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती शोध के स्तर पर है और इसे किसी मरीज के भविष्य का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

​कैसे काम करता है यह एआई टूल?

​शोधकर्ताओं ने इस एआई मॉडल को 4 करोड़ से अधिक चेहरे की तस्वीरों के जरिए प्रशिक्षित किया है, ताकि यह विभिन्न आयु वर्ग और पृष्ठभूमि के लोगों के चेहरे की विशेषताओं को बारीकी से समझ सके। इस शोध के तहत दो पूरक एआई टूल विकसित किए गए हैं:

​एफएएचआर-फेसएज (FAHR-FaceAge): यह टूल चेहरे के आधार पर किसी व्यक्ति की जैविक उम्र (Biological Age) का अनुमान लगाता है और उससे कैंसर में जीवित रहने की संभावना का आकलन करने में मदद करता है।

​एफएएचआर-फेससर्वाइवल (FAHR-FaceSurvival): यह टूल सीधे चेहरे की तस्वीर से जीवित रहने से जुड़े जोखिम का अनुमान लगाने की कोशिश करता है।

​चेहरे के अलग-अलग हिस्सों का विश्लेषण:

​अध्ययन के अनुसार, एआई के ये दोनों टूल चेहरे के अलग-अलग हिस्सों का विश्लेषण करते हैं:

​जैविक उम्र का आकलन करने वाला मॉडल: यह माथे, कनपटियों और नाक के किनारों से मुंह तक जाने वाली रेखाओं का विश्लेषण करता है।

​जोखिम का आकलन करने वाला मॉडल: यह मुख्य रूप से आंखों के नीचे और नाक के ऊपरी हिस्से के आसपास की विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करता है।

​तकनीक का महत्व और इसके संभावित लाभ:

​व्यक्तिगत उपचार (Personalized Approach): कैंसर के उपचार में मरीज की उम्र के साथ-साथ उसकी शारीरिक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य भी बेहद मायने रखते हैं। यह तकनीक डॉक्टरों को मरीज की स्थिति समझने के लिए एक अतिरिक्त आकलन प्रदान करती है।

​स्वास्थ्य संकेतों की पहचान: चेहरे पर दिखने वाले कुछ सूक्ष्म संकेत शरीर की समग्र सेहत और जैविक उम्र (यानी शरीर की वास्तविक शारीरिक स्थिति) के बारे में उपयोगी जानकारी दे सकते हैं।

​चुनौतियां और सावधानियां:

​शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के सामने अभी कई व्यावहारिक और नैतिक चुनौतियां हैं:

​यह तकनीक कैंसर के प्रकार, बीमारी की अवस्था (Stage), मरीज के विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार के प्रति उसकी प्रतिक्रिया का विकल्प नहीं हो सकती।

​यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विभिन्न त्वचा रंगों, जातियों और आयु के लोगों के लिए यह तकनीक समान रूप से विश्वसनीय हो।

​चूंकि चेहरे की तस्वीरें निजी जैविक पहचान से जुड़ी होती हैं, इसलिए चिकित्सकीय इस्तेमाल में मरीज की सहमति, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

​निष्कर्ष:

भविष्य में व्यापक परीक्षणों और प्रमाणिकता के बाद यह तकनीक डॉक्टरों के लिए एक सहायक टूल साबित हो सकती है, लेकिन किसी भी मरीज के उपचार और उसके भविष्य से जुड़े निर्णय हमेशा पारंपरिक चिकित्सकीय जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही लिए जाने चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *