Sunday, October 25, 2026
धर्म

शरद पूर्णिमा: चंद्रमा की 16 कलाओं का रहस्य और अमृत वर्षा की पौराणिक व धार्मिक परंपरा

शरद पूर्णिमा: चंद्रमा की 16 कलाओं का रहस्य और अमृत वर्षा की पौराणिक व धार्मिक परंपरा

​आज शरद पूर्णिमा है, जिसे हिंदू धर्म में साल की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमा माना जाता है। आश्विन मास में आने वाली इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी पावन रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ अलौकिक ‘महारास’ रचाया था।

​क्यों खास है शरद पूर्णिमा की रात?

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे वर्ष में केवल यही एक रात होती है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण (पूर्ण सौंदर्य और शक्ति के साथ) होता है। ज्योतिष शास्त्र में इस रात की चांदनी को बेहद प्रभावशाली, दिव्य और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।

​चंद्रमा की 16 कलाएं और उनका धार्मिक महत्व:

​अमृता: अमरत्व और जीवन की निरंतरता का प्रतीक (जीवन प्रदान करने वाली शक्ति)।

​मंदा: मन की स्थिरता, एकाग्रता और शांति का प्रतीक।

​पुष्य: सौंदर्य, निखार और सुंदरता के महत्व को दर्शाने वाली।

​पुष्टि: शरीर और मन के समुचित विकास व पोषण का प्रतीक।

​तुष्टि: आंतरिक संतोष और तृप्ति प्रदान करने वाली।

​धृति: धैर्य, संयम और सहनशीलता का प्रतीक।

​शशिनी (शाशनी): प्रकाश, विवेक और ज्ञान देने वाली कला।

​चंद्रिका: चांदनी की तरह शीतलता और नई दिशा देने वाली।

​कांति: तेज, ओज और चेहरे के सौंदर्य से युक्त।

​ज्योत्स्ना: अज्ञान व अंधकार को दूर करने वाला मंद और शीतल प्रकाश।

​श्री: समृद्धि, वैभव और मां लक्ष्मी की कृपा का रूप।

​प्रीति: आपसी प्रेम और स्नेह प्रदान करने वाली।

​अंगदा: शरीर के अंग-प्रत्यंग में मजबूती और कांति देने वाली।

​रति: आकर्षण, प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक।

​स्मृति: स्मरण शक्ति और शुद्ध अनुभवों से संबंधित।

​वपु: उत्तम स्वास्थ्य, सुगठित शरीर और सुंदरता का प्रतीक।

​शरद पूर्णिमा पर क्यों रखी जाती है खुले आसमान नीचे खीर?

​शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से ‘अमृत’ झडता है। इसी कारण इस रात खुले आसमान के नीचे दूध और चावल से बनी खीर रखने की प्राचीन परंपरा है:

​औषधीय व स्वास्थ्य लाभ: चंद्रमा की 16 कलाओं से निकलने वाली किरणें जब खीर पर पड़ती हैं, तो माना जाता है कि वह औषधीय गुणों से भर जाती है।

​प्रसाद ग्रहण करना: सुबह इस खीर का सेवन करने से निरोगी काया, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

​(डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक आस्थाओं, मान्यताओं और पौराणिक ग्रंथों पर आधारित है।)

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