RSV से हर साल 36 लाख मासूम अस्पताल में भर्ती, WHO की चेतावनी: जानें लक्षण और बचाव के उपाय
RSV से हर साल 36 लाख मासूम अस्पताल में भर्ती, WHO की चेतावनी: जानें लक्षण और बचाव के उपाय
नई दिल्ली: आम सर्दी-जुकाम की तरह दिखने वाला रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) छोटे बच्चों के लिए एक गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य खतरा बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अत्यधिक संक्रामक इस वायरस के कारण दुनिया भर में हर साल 36 लाख से अधिक बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, जबकि लगभग 1 लाख मासूमों की मौत हो जाती है।
अत्यधिक संक्रामक और जोखिम वर्ग: WHO के मुताबिक, RSV संक्रमित बूंदों, दूषित सतहों और छूने से तेजी से फैलता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं, समय से पहले (प्री-मैच्योर) जन्मे बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों के लिए यह बेहद घातक साबित हो सकता है।
सामान्य और गंभीर लक्षण: शुरुआती अवस्था में नाक बहना, खांसी, छींक और हल्का बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। हालांकि, यदि बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो, दूध पीने में परेशानी हो, अत्यधिक सुस्ती छाए या होंठ व नाखून नीले पड़ने लगें, तो इसे आपातकालीन स्थिति मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के मुख्य उपाय: शिशुओं को संभालने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं, बीमार व्यक्तियों से दूर रखें और घर की सतहों को साफ रखें। बच्चे के पास धूम्रपान बिल्कुल न करें। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशुओं के माता-पिता डॉक्टरी सलाह से RSV वैक्सीन या एंटीबॉडी विकल्पों की जानकारी ले सकते हैं।
