Friday, September 11, 2026
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चमोली भूस्खलन पर डराने वाली वैज्ञानिक स्टडी: प्राकृतिक नहीं, इंसानी दखल और ये वजहें बन रहीं तबाही की बड़ी वजह

चमोली भूस्खलन पर डराने वाली वैज्ञानिक स्टडी: प्राकृतिक नहीं, इंसानी दखल और ये वजहें बन रहीं तबाही की बड़ी वजह

​उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रहे भूस्खलन को लेकर वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। नई वैज्ञानिक स्टडी के अनुसार, इसे केवल प्राकृतिक आपदा नहीं माना जा सकता, बल्कि इसके पीछे इंसानी दखल और कई अन्य महत्वपूर्ण कारण भी जुड़े हैं। अध्ययन के मुताबिक, चमोली जिले का 452 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लैंडस्लाइड के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।

​यह शोध रिपोर्ट ‘Comparative assessment of landslide susceptibility using heuristic and statistical models in Chamoli Uttarakhand’ के नाम से गत 7 सितंबर 2026 को International Journal of Geo-Engineering में प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट को ग्राफिक एरा (उत्तराखंड) के संदीप कुंवर व हरीश कोहली, एनएसयूटी दिल्ली के हर्ष कुमार और रामपूरी घाट कॉलेज के जयंता दास जैसे वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है।

​1,821 भूस्खलन क्षेत्रों का अध्ययन और मॉडल

वैज्ञानिकों ने चमोली जिले में सबसे पहले भूस्खलन वाली 1,821 जगहों को चिन्हित किया और 24 प्राकृतिक व मानवजनित कारणों (जैसे ढलान, बारिश, भूगर्भीय संरचना, सड़क, और नदियां) का बारीकी से अध्ययन किया। इस रिसर्च में तीन मॉडलों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें फ्रीक्वेंसी रेशियो (Frequency Ratio) मॉडल सबसे बेहतर साबित हुआ। इसी मॉडल के आधार पर 70 फीसदी यानी 1,260 लैंडस्लाइड इलाकों की मुख्य रूप से स्टडी की गई।

​सड़कें और वनों की कटाई बन रहे हैं सबसे बड़े खतरे

अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अंधाधुंध विकास और मानवीय गतिविधियां खतरे को कई गुना बढ़ा रही हैं:

​वनों की कटाई (डिफॉरेस्टेशन): साल 2008 और 2024 के वन आवरण की तुलना करने पर पता चला कि जिन इलाकों में पेड़ों की कटाई ज्यादा हुई (करीब 3.13 फीसदी हिस्सा), वहां लैंडस्लाइड की आवृत्ति 16.70 फीसदी तक दर्ज की गई।

​सड़क नेटवर्क: विशेष विश्लेषण में यह साफ हुआ कि रोड कॉरिडोर और रिवर बैंक्स के आसपास के इलाके अत्यधिक संवेदनशील हैं। चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में घाटियों से गुजरती सड़कें, पर्यटन, बिजली परियोजनाएं और परिवहन लैंडस्लाइड के साथ एक खतरनाक कॉम्बिनेशन बनाते हैं।

​संवेदनशीलता के आधार पर पांच श्रेणियां

फ्रीक्वेंसी रेशियो के आधार पर चमोली जिले के कुल 7,794 वर्ग किमी क्षेत्र को पांच श्रेणियों में बांटा गया है:

​very Low श्रेणी: 556.57 वर्ग किमी (7.14%)

​Low श्रेणी: 2054.64 वर्ग किमी (26.36%)

​Moderate श्रेणी: 2552.05 वर्ग किमी (32.74%)

​High श्रेणी: 2178.40 वर्ग किमी (27.95%)

​Very High श्रेणी: 452.85 वर्ग किमी (5.81%)

​आंकड़ों के मुताबिक, जिले का कुल 2,631 वर्ग किमी क्षेत्र ‘हाई’ या ‘वेरी हाई’ श्रेणी में आता है, जहां भूस्खलन की पूरी संभावना बनी रहती है। रिपोर्ट में साल 2021 की ऋषिगंगा आपदा का भी जिक्र किया गया है, जो यह बताती है कि टेक्टोनिक एक्टिविटी, कमजोर चट्टानों और तीव्र ढाल वाले इस क्षेत्र में भारी बारिश के साथ मानवीय हस्तक्षेप बड़े जोखिम को न्योता देता है।

​वैज्ञानिकों के सुझाव और चेतावनी

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि इस संवेदनशीलता मैप का इस्तेमाल जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों द्वारा सड़क योजना, स्लोप स्टेबलाइजेशन, निर्माण नियंत्रण और वनीकरण (Afforestation) की नीतियों में किया जाना चाहिए। खड़ी ढलान, कमजोर भूगर्भीय संरचना और सड़क कॉरिडोर वाले क्षेत्रों की विशेष निगरानी की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में बड़े खतरों से बचा जा सके।

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