उत्तराखंड

नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में फैसला सुरक्षित, जमीन के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल

नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में फैसला सुरक्षित, जमीन के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने और प्रस्तावित स्थल की जमीन को लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

हाईकोर्ट शिफ्टिंग को लेकर क्या है विवाद?

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड को पर्वतीय राज्य बनाने के मूल उद्देश्य का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि राज्य गठन का एक प्रमुख उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों का विकास था। ऐसे में यदि हाईकोर्ट को नैनीताल से कहीं और स्थानांतरित किया जाना है तो उसे मैदानी क्षेत्र हल्द्वानी के बजाय पहाड़ के किसी अन्य हिस्से में स्थापित किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने सरकार के हल्द्वानी में ही हाईकोर्ट शिफ्ट करने के फैसले पर भी सवाल उठाए और कहा कि अन्य संभावित स्थानों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन को लेकर आपत्ति

मामले में याचिकाकर्ता और राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता रमन शाह ने बेल बाबा क्षेत्र के पास प्रस्तावित जमीन को लेकर गंभीर कानूनी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिलाधिकारी नैनीताल की ओर से हाईकोर्ट के लिए रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन का प्रस्ताव तैयार किया गया, जो वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 के प्रावधानों के विपरीत है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में रोक लगी हुई थी, उसी दौरान मई 2026 में विवादित भूमि को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि चिन्हित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण हुआ है और यह इलाका हाथी कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है।

केंद्र की मंजूरी का मुद्दा भी उठा

याचिकाकर्ताओं ने रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन के इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार की अनिवार्य अनुमति का मुद्दा भी उठाया। उनका तर्क था कि वन संरक्षण कानून के तहत रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन का इस्तेमाल बदलने या उसे डी-रिजर्व करने के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 15 जुलाई 2026 के आदेश और उत्तराखंड सरकार की 12 अगस्त 2026 की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन दस्तावेजों में भी संबंधित भूमि को वन भूमि के रूप में ही माना गया है।

सरकार ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों का विरोध किया। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ रही है।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्रस्तावित स्थल हाथी कॉरिडोर का हिस्सा नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने इस दलील पर भी सवाल उठाए और पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल जिले में उपयुक्त जमीन तलाशने की बात कही थी, तो सरकार हल्द्वानी को लेकर ही क्यों आगे बढ़ रही है।

अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत हाईकोर्ट की प्रस्तावित शिफ्टिंग और बेल बाबा क्षेत्र की जमीन के इस्तेमाल को लेकर क्या फैसला सुनाती है।

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