तमिलनाडु विधानसभा में ‘तमिल थाई वजथु’ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित: सरकारी कार्यक्रमों में गाना हुआ अनिवार्य
तमिलनाडु विधानसभा में ‘तमिल थाई वजथु’ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित: सरकारी कार्यक्रमों में गाना हुआ अनिवार्य
तमिलनाडु विधानसभा ने राज्य के आधिकारिक राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ (Tamil Thai Vaazhthu) से जुड़े एक विशेष प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इसके तहत अब राज्य में आयोजित होने वाले सभी सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में इस गीत को गाना अनिवार्य कर दिया गया है।
1. सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव
राजनीतिक दलों का समर्थन: मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश किए गए इस विशेष प्रस्ताव को पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला।
समर्थक दल: DMK, AIADMK, कांग्रेस, PMK, VCK, CPI, बीजेपी (BJP) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) समेत सभी दलों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिसके बाद स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने इसे पारित घोषित किया।
2. राज्य गीत का इतिहास और महत्व
रचयिता और उत्पत्ति: यह गीत प्रसिद्ध लेखक मनोन्मनीयम सुंदरनार द्वारा लिखित नाटक ‘मनोन्मनीयम’ से लिया गया है।
इतिहास: 1970 में पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के शासनकाल में इसे सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाने की परंपरा शुरू हुई थी। इसके बाद 17 दिसंबर 2021 को एम.के. स्टालिन सरकार ने इसे औपचारिक रूप से तमिलनाडु के ‘राज्य गीत’ का दर्जा दिया था।
सांस्कृतिक पहचान: मुख्यमंत्री विजय और AIADMK महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने जोर देकर कहा कि यह गीत केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि तमिल भाषा, संस्कृति, गौरव और पहचान का प्रतीक है।
3. कानूनी सुरक्षा का उद्देश्य
प्रस्ताव को पारित करने का मुख्य उद्देश्य इस परंपरा को मजबूत कानूनी सुरक्षा देना है, ताकि भविष्य में इसके दर्जे या प्रधानता को बदला न जा सके। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के जुलाई 2026 के एक संचार का हवाला देते हुए कहा कि राज्य गीत का सम्मान राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनना चाहिए।
