राजनीति

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड प्रस्ताव पर हंगामा, BJP विधायक रंधावा को मार्शल ने बाहर निकाला

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड प्रस्ताव पर हंगामा, BJP विधायक रंधावा को मार्शल ने बाहर निकाला

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद जमकर हंगामा हुआ। प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ दिए जाने पर भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई और सदन के वेल में पहुंचकर विरोध किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि स्पीकर ने पहले कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित की और बाद में सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। भाजपा विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला।

उमर अब्दुल्ला ने पेश किया राज्य का दर्जा बहाली का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा से पारित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें केंद्र सरकार से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजने की बात कही गई है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने केंद्र को उसके कथित आश्वासन की याद दिलाते हुए कहा कि अब इस दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।

2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ पर BJP ने जताई आपत्ति

प्रस्ताव में 26 जून 2000 के उस प्रस्ताव का संदर्भ दिया गया है, जिसे तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्वायत्तता बहाल करने के मुद्दे पर पारित किया था। इसी संदर्भ को लेकर भाजपा विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया। भाजपा सदस्यों ने कहा कि सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने दी जाएगी।

भाजपा विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने भी नारे लगाए। हंगामे के बीच भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं।

विक्रम रंधावा को मार्शल ने बाहर निकाला

हंगामा बढ़ने पर भाजपा विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर की ओर से सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील के बावजूद हंगामा जारी रहा। इसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

क्या है जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे का मामला?

अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर एक पूर्ण राज्य था। 5 अगस्त 2019 के बाद संवैधानिक और प्रशासनिक बदलावों के तहत जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था के कारण राज्य के पुराने दर्जे से अलग संवैधानिक ढांचा लागू है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करते रहे हैं। शुक्रवार को विधानसभा में पेश किया गया प्रस्ताव इसी मांग को केंद्र सरकार तक औपचारिक रूप से पहुंचाने से जुड़ा है।

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