उत्तराखंड में बारिश व भूस्खलन का तांडव: टिहरी में पुल टूटा, हरिद्वार में सड़क धंसी, चमोली में पोकलैंड की बकेट से नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
उत्तराखंड में बारिश व भूस्खलन का तांडव: टिहरी में पुल टूटा, हरिद्वार में सड़क धंसी, चमोली में पोकलैंड की बकेट से नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
उत्तराखंड में बीते दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें मलबे से बंद हैं और सीमांत इलाकों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।
1. टिहरी और हरिद्वार जिले में स्थिति
टिहरी में पुल टूटा व सड़कें बंद: भिलंगना व बालगंगा क्षेत्र में भूस्खलन हुआ है। नैलचामी में भेलगड़ी-पुडोली के बीच बना लकड़ी का पुल बहने से ग्रामीणों का संपर्क कट गया। SDRF ने प्रभावितों का सुरक्षित रेस्क्यू किया। जिले में 2 राज्य मार्ग और 14 ग्रामीण सड़कें मलबे से बंद हैं।
हरिद्वार में सड़क धंसी व गंगा का उफान: लक्सर-रुड़की मार्ग पर बहादरपुर फाटक के पास सड़क धंसने से लंबा जाम लग गया, जिसे PWD ने अस्थायी रूप से ठीक कराया। गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी निशान के पार पहुंच गया है।
2. चमोली जिले की बदहाली: जान जोखिम में डालते ग्रामीण
नंदानगर घाट में नदी पार करने की मजबूरी: सितंबर 2025 की आपदा में बहे पैदल रास्तों का एक साल बाद भी निर्माण नहीं हो सका है। उफनाते मौख गाड़ को पार करने के लिए अभिभावक बच्चों को पीठ पर लादकर ले जा रहे हैं।
देवाल-वाण मार्ग पर पोकलैंड मशीन का सहारा: गामरी गाड़ में भारी मलबा और दलदल आने से सड़क बंद हो गई है। लोग पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर खौफनाक तरीके से नाला पार कर रहे हैं, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। इस मार्ग के बंद होने से 8 हजार की आबादी प्रभावित है।
3. 26 सालों बाद भी सीमांत इलाकों की चुनौती
राज्य गठन के 26 वर्षों बाद भी सीमांत जिलों में पक्की सड़कों और स्थायी पुलों का न होना गंभीर समस्या बना हुआ है। मानसून के दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवा, बच्चों की पढ़ाई और राशन की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
