उत्तराखंड

उत्तराखंड: मतदाता सूची के SIR अभियान पर मचा राजनीतिक घमासान, 19 लाख नोटिसों और फॉर्म-7 पर आमने-सामने BJP-कांग्रेस

उत्तराखंड: मतदाता सूची के SIR अभियान पर मचा राजनीतिक घमासान, 19 लाख नोटिसों और फॉर्म-7 पर आमने-सामने BJP-कांग्रेस

​देहरादून: उत्तराखंड में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दूसरे चरण को लेकर राज्य की राजनीति गर्मा गई है। प्रदेश के 19.04 लाख से अधिक मतदाताओं को विसंगतियों (Anomalies) के चलते नोटिस जारी किए गए हैं। इससे पहले, प्रथम चरण के दौरान एएसडीडी (Absent/Shifted/Dead/Duplicate) श्रेणी के तहत 8.26 लाख से अधिक वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं।

​1. आंकड़ों का खेल और फॉर्म-7 को लेकर विवाद

​वर्तमान मतदाता स्थिति: प्रथम चरण के बाद 14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट रोल के अनुसार राज्य में 71,33,785 मतदाता हैं।

​नोटिस की स्थिति: दूसरे चरण में भरे गए फॉर्मों में स्पेलिंग या अन्य त्रुटियों (Anomalies) तथा बिना मैपिंग वाले मतदाताओं को चिन्हित कर करीब 24 लाख नोटिसों के सापेक्ष 19 लाख से अधिक नोटिस BLO के जरिए भेजे गए हैं।

​फॉर्म-7 पर विवाद: किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 (Form-7) को लेकर कांग्रेस आक्रामक है। कांग्रेस का आरोप है कि इस फॉर्म का दुरुपयोग कर उसके समर्थित वोटरों के नाम चुन-चुनकर काटने की सुनियोजित साजिश की जा रही है।

​2. मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पक्ष

​मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया:

​दावे और आपत्तियों के चरण में एक व्यक्ति अधिकतम 5 मामलों में आपत्ति दर्ज करा सकता है।

​राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) एक दिन में 10 और पूरी अवधि में अधिकतम 30 फॉर्म ही जमा कर सकते हैं। इससे अधिक मामले आने पर ERO/AERO स्वयं अपने स्तर पर भौतिक सत्यापन और जांच करेंगे।

​उन्होंने निर्देश दिए हैं कि साधारण त्रुटियों वाले मामलों का बीएलओ स्तर पर ही निस्तारण किया जाए ताकि आम नागरिकों को असुविधा न हो।

​3. राजनीतिक दलों के आरोप और प्रत्यारोप

​कांग्रेस का रुख (राजेंद्र सिंह भंडारी व प्रतिमा सिंह):

​कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे से फॉर्म-7 भरकर वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने फर्जी आपत्तियों की जांच न होने पर आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

​भाजपा का पलटवार (मथुरा दत्त जोशी व कुंदन परिहार):

​बीजेपी का कहना है कि यह एक नियमित और प्रशासनिक प्रक्रिया है। नोटिस केवल प्रामाणिकता और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए दिए जा रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर जनता के बीच भ्रम और नकारात्मक राजनीति फैलाने का आरोप लगाया।

​हाई-प्रोफाइल नोटिस

​एसआईआर प्रक्रिया की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नैनीताल विधानसभा सीट पर जारी जांच के दौरान कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और स्थानीय बीजेपी विधायक सरिता आर्या तक को नोटिस जारी हुआ है।

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