चुनाव आयोग पर असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला: ‘जब सदस्य ही फैसलों से अनजान हैं, तो उनकी कानूनी वैधता क्या है?’
चुनाव आयोग पर असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला: ‘जब सदस्य ही फैसलों से अनजान हैं, तो उनकी कानूनी वैधता क्या है?’
मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर उपजे विवाद में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निर्णयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ओवैसी के मुख्य बयान और सवाल
फैसलों की कानूनी वैधता पर सवाल: ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अगर चुनाव आयोग के अधिकांश सदस्य ही उन फैसलों से वाकिफ नहीं हैं जो उनके नाम पर लिए जा रहे हैं, तो ऐसे फैसलों की कानूनी वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
गरीबों और वंचितों की परेशानी: उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया ने देश के सबसे गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया ने लोगों से उनके नागरिक होने का सम्मान छीनकर उन्हें केवल दस्तावेजों तक सीमित कर दिया है।
जवाबदेही और निगरानी पर चिंता: ओवैसी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहले यह सवाल उठता था कि ‘निगरानी करने वालों पर नजर कौन रखेगा?’, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब यह सवाल बन गया है कि ‘क्या कोई निगरानी करने वाला बचा भी है?’
विपक्ष का लगातार हमला
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी (केजरीवाल) के बाद ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल उस मीडिया रिपोर्ट का हवाला देकर मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार को घेर रहे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय और एसआईआर जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह से कानूनी रूप से मान्य हैं और सभी सदस्यों की सहमति से ही संचालित की गई हैं।
