Wednesday, September 23, 2026
राजनीति

संबित पात्रा का पलटवार: चुनाव आयुक्तों के बीच चर्चा और पत्राचार को बताया स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी, विपक्ष पर साधा निशाना

संबित पात्रा का पलटवार: चुनाव आयुक्तों के बीच चर्चा और पत्राचार को बताया स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी, विपक्ष पर साधा निशाना

​मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक चर्चाओं को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श और पत्राचार तानाशाही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का प्रमाण है।

​संबित पात्रा के बयान के मुख्य बिंदु

​विपक्ष के दोहरे रवैये पर सवाल: पात्रा ने कहा कि विपक्ष पहले यह आरोप लगाता था कि चुनाव आयोग के सदस्य बिना किसी चर्चा के सरकार के इशारे पर एक ही फैसले पर आँख मूंदकर मुहर लगा देते हैं। लेकिन अब जब यह सामने आया है कि आयुक्तों के बीच विभिन्न मुद्दों पर आधिकारिक बातचीत और पत्राचार हुआ है, तो भी विपक्ष सवाल उठा रहा है।

​सर्वसम्मति से हुआ फैसला: बीजेपी सांसद ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, सभी लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद अंततः एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर पूरी तरह सर्वसम्मति बनी थी। उनके अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्त एकमत थे और उनके बीच कोई स्थायी मतभेद नहीं था।

​पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया: संबित पात्रा ने पूर्व की सरकारों (विशेषकर कांग्रेस के कार्यकाल) पर निशाना साधते हुए पूर्व चुनाव आयुक्त नवीन चावला की नियुक्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 2023 के नए कानून के तहत अब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री के साथ-साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी शामिल होते हैं, जिससे यह प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक पारदर्शी हुई है।

​सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र: पात्रा ने याद दिलाया कि SIR प्रक्रिया की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, जहाँ 27 मई 2026 के अदालत के फैसले में इसकी वैधता को बरकरार रखा गया था।

​जनता ही अंतिम निर्णायक: विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत का फैसला संस्थाओं पर अनर्गल आरोप लगाकर नहीं, बल्कि जनता की अदालत में होता है। जनता ही वोट देकर सरकार चुनती है और बदलती है।

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