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होर्मुज स्ट्रेट समझौता: अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की शर्त पर ओमान-ईरान डील अंतिम चरण में

होर्मुज स्ट्रेट समझौता: अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की शर्त पर ओमान-ईरान डील अंतिम चरण में

​वाशिंगटन/तेहरान: 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष के कारण बंद पड़े दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। ईरान और ओमान के बीच एक नए शिपिंग रूट पर सहमति बन गई है, जिसका मसौदा अब अंतिम चरण में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि इस समझौते की घोषणा इसी हफ्ते हो सकती है।

​1. समझौते के मुख्य बिंदु और नई शर्तें

​नया शिपिंग कॉरिडोर: प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाजों की आवाजाही के लिए ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरने वाला नया रूट तय किया गया है। खाड़ी में प्रवेश करने वाले अधिकांश जहाज ईरान के नियंत्रण वाले क्षेत्र से गुजरेंगे।

​ईरान की नाकेबंदी हटाने की शर्त: यह समझौता तभी प्रभावी होगा जब अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को हटाएगा।

​अधिकार और शुल्क का विवाद: ईरान इस मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और प्रवेश/निकास मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क (Service Fees/Transit Fees) वसूलना चाहता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका किसी भी देश को मनमाना शुल्क वसूलने या होर्मुज पर एकतरफा अधिकार कायम करने की अनुमति नहीं देगा।

​2. वैश्विक अर्थव्यवस्था और ट्रंप प्रशासन पर दबाव

​तेल की कीमतें और महंगाई: दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके ठप होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें आसमान छू रही हैं।

​राजनीतिक दबाव: अमेरिका में आगामी संसदीय चुनावों के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस युद्ध को समाप्त करने और आर्थिक संकट को दूर करने का भारी राजनीतिक दबाव है।

​3. भावी संभावनाएं

​ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यदि कोई तीसरा पक्ष (अमेरिका) अड़ंगा नहीं लगाता है, तो जल्द ही ओमान और ईरान का संयुक्त बयान जारी कर दिया जाएगा। यदि यह अस्थायी समझौता सफल रहता है, तो यह जून में टूटे समझौते को पुनर्जीवित कर सकता है और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा बातचीत का रास्ता साफ कर सकता है।

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