अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: अदालत में 7,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, वकीलों ने जताया विरोध
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: अदालत में 7,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, वकीलों ने जताया विरोध
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में बुधवार को अदालत में लगभग सात हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। एसआईटी (SIT) द्वारा पूरी की गई इस जांच के तहत 25 सितंबर की तय समयसीमा से पहले यह चार्जशीट पेश की गई है, क्योंकि जांच के लिए निर्धारित 90 दिनों की अवधि इसी तारीख को पूरी हो रही थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भी अवगत कराया था कि चार्जशीट समय पर दाखिल कर दी जाएगी।
चार्जशीट और जांच से जुड़े मुख्य बिंदु
सीसीटीवी और फॉरेंसिक सबूत: जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर काउंटिंग रूम से कथित तौर पर नकदी निकालने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान की गई। इसके अलावा फॉरेंसिक ऑडिट, वित्तीय रिकॉर्ड, बरामदगी और 173 गवाहों के बयानों को चार्जशीट का मुख्य आधार बनाया गया है।
बरामदगी: चार्जशीट में कुल 79.85 लाख रुपये नकद, एक कार और विभिन्न आभूषणों की बरामदगी का विशेष रूप से जिक्र किया गया है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा गवाह के रूप में शामिल: इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया गया है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें इस मामले में गवाह बनाया गया है और अब वे अपनी गवाही देंगे। चंपत राय के अलावा गोपाल राव और कृष्ण मोहन को भी गवाहों की सूची में शामिल किया गया है।
अदालत परिसर में वकीलों का विरोध और हंगामा
चार्जशीट दाखिल होने के बाद स्थानीय अदालत परिसर में वकीलों की नाराजगी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला:
वकीलों की मांग: स्थानीय वकीलों ने मांग की कि अदालत द्वारा इस पर संज्ञान लेने से पहले उनकी आपत्तियों को सुना जाए और उन्हें पूरी चार्जशीट का अवलोकन कराया जाए।
नाराजगी की वजह: रिपोर्ट के अनुसार, वकील इस बात से भी नाराज थे कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों (जैसे चंपत राय) को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है।
मामले का समाधान: जिला जज के साथ हुई बातचीत और आश्वासन के बाद वकीलों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया और अदालत में काम सुचारू रूप से शुरू हो गया।
