हरिद्वार कांवड़ मेला: गंगा की उफनती लहरों में तैनात हुई ‘वाटर एंबुलेंस’, 1.80 करोड़ पहुंचे श्रद्धालु
हरिद्वार कांवड़ मेला: गंगा की उफनती लहरों में तैनात हुई ‘वाटर एंबुलेंस’, 1.80 करोड़ पहुंचे श्रद्धालु
हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेला अपने शबाब पर है। बुधवार शाम तक हरिद्वार आने वाले कांवड़ियों का आंकड़ा 1 करोड़ 80 लाख को पार कर चुका है। भारी भीड़ और गंगा के उफान को देखते हुए पुलिस-प्रशासन, SDRF, जल पुलिस और आपदा मित्रों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
1. क्या है ‘वाटर एंबुलेंस’ और कैसे करती है काम?
नदी के रास्ते त्वरित इलाज: मेले में ‘लाइफ बोट’ (बोट) को ‘वाटर एंबुलेंस’ का नाम दिया गया है, जिसे गंगा घाटों पर तैनात किया गया है।
सड़क मार्ग के ट्रैफिक से बचाव: हरकी पैड़ी और आसपास के इलाकों में सड़कों पर भारी भीड़ होने के कारण मरीज को अस्पताल ले जाने में देरी हो सकती है। ऐसे में बीमार या डूबने से बचाए गए श्रद्धालु को बोट के जरिए सीधे निकटतम ओम घाट पहुंचाया जाता है।
तत्काल अस्पताल ट्रांसफर: ओम घाट पर पहले से ही एंबुलेंस तैनात रहती है, जो श्रद्धालु को चंद मिनटों में जिला अस्पताल पहुंचा देती है।
25-30 जानें बचाई गईं: SDRF इंस्पेक्टर कवीन्द्र सजवाण के अनुसार, अब तक वाटर एंबुलेंस और रेस्क्यू टीमों की मदद से 25 से 30 कांवड़ियों की जान बचाई जा चुकी है।
2. सबसे चुनौतीपूर्ण घाट और खतरे का कारण
संवेदनशील स्थान: कांगड़ा घाट और सीसीआर (CCR) घाट को सुरक्षा के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है।
बड़ी चुनौतियां: गंगा नदी का तेज बहाव और श्रद्धालुओं का बिना सुरक्षा उपायों के नदी के बीच जाकर स्नान करना सबसे बड़ा खतरा बन रहा है।
24 घंटे निगरानी: आपात स्थिति से निपटने और ‘क्विक रिस्पांस टाइम’ (QRT) में जान बचाने के लिए SDRF, जल पुलिस और आपदा मित्र घाटों पर 24 घंटे तैनात हैं।
