अकाल तख्त का कड़ा फैसला: रेप मामले में घिरे SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला और ग्रंथी मलकीत सिंह पंथ से निष्कासित
अकाल तख्त का कड़ा फैसला: रेप मामले में घिरे SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला और ग्रंथी मलकीत सिंह पंथ से निष्कासित
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने कड़ा कदम उठाते हुए रेप और दुर्व्यवहार के मामलों का सामना कर रहे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य और अकाली दल के वरिष्ठ नेता अमरजीत सिंह चावला तथा अकाल तख्त के अतिरिक्त हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को सिख पंथ से निष्कासित कर दिया है। यह फैसला अकाल तख्त सचिवालय में हुई पांच सिंह साहिबानों की बैठक में लिया गया, जिसकी घोषणा कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने की।
प्रमुख निर्णय और निर्देश
पंथ से निष्कासन और ‘गुरमाता’: अकाल तख्त ने आनंदपुर साहिब में दर्ज रेप मामले को गंभीर पंथिक अनुशासनहीनता और सिख मर्यादा का उल्लंघन मानते हुए ‘गुरमाता’ पारित किया और दोनों को पंथ से बाहर कर दिया।
बहिष्कार का आदेश: सिख समुदाय को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अमरजीत सिंह चावला के साथ कोई भी धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक संबंध न रखा जाए।
आजीवन प्रतिबंध: चावला और मलकीत सिंह दोनों पर आजीवन किसी भी सिख संस्था, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति या धार्मिक मंच पर सेवा देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
एफआईआर और आरोप: 21 अगस्त को एक महिला की शिकायत पर आनंदपुर साहिब में अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 64, 127(2) और 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसे आनंदपुर साहिब की एक सराय में बंधक बनाकर दुष्कर्म किया गया।
अन्य आरोपियों के नाम: महिला की शिकायत में अतिरिक्त हेड ग्रंथी मलकीत सिंह और तख्त केसगढ़ साहिब के चालक मोहन सिंह के खिलाफ भी अश्लील संदेश भेजने के आरोप हैं।
इस्तीफा और सफाई: मामले के तूल पकड़ने के बाद अमरजीत सिंह चावला ने SGPC की सदस्यता और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, साथ ही इन सभी आरोपों को एक राजनीतिक साजिश करार दिया था।
