Thursday, August 6, 2026
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उत्तराखंड हाईकोर्ट: सरकारी अस्पतालों की बदहाली और बायो-मेडिकल वेस्ट पर सख्त रुख, स्वास्थ्य सचिव 12 अगस्त को कोर्ट में तलब

उत्तराखंड हाईकोर्ट: सरकारी अस्पतालों की बदहाली और बायो-मेडिकल वेस्ट पर सख्त रुख, स्वास्थ्य सचिव 12 अगस्त को कोर्ट में तलब

​नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल वेस्ट के खुले में निस्तारण से जुड़ी जनहित याचिकाओं (PIL) पर एक साथ सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों मामलों में राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) से जवाब मांगा है।

​1. अस्पतालों की बदहाली और डॉक्टरों के तबादले पर हाईकोर्ट की सख्ती

​स्वास्थ्य सचिव व्यक्तिगत रूप से तलब: कोर्ट ने राज्य में लचर स्वास्थ्य सेवाओं की रिपोर्ट पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

​डॉक्टरों के स्थानांतरण पर सवाल: न्यायमित्र ने कोर्ट को बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज (सुशीला तिवारी अस्पताल) और बीडी पांडे जिला अस्पताल से वरिष्ठ डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया है, लेकिन उनके स्थान पर नए विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की गई है। तबादले उन अस्पतालों में किए जा रहे हैं जो चालू ही नहीं हैं।

​नैनीताल सेनेटोरियम अस्पताल: कोर्ट ने नैनीताल के सेनेटोरियम अस्पताल को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाने के लिए दिए गए पूर्व निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट मांगी। सरकार ने बताया कि ₹250 करोड़ की DPR वित्त विभाग की स्वीकृति के लिए भेजी गई है, जिस पर कोर्ट ने 1 हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट देने को कहा।

​2. पिथौरागढ़ में मेडिकल वेस्ट के अवैध निस्तारण पर कड़े निर्देश

​डॉ. राजेश पांडे द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मेडिकल वेस्ट को खुले में, नदियों, नालों और कूड़ेदानों में फेंके जाने पर गहरी चिंता जताई।

​कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जिले में ‘कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट’ लगाने के लिए स्थान का चयन कर कोर्ट को सूचित किया जाए।

​अस्पतालों की जांच और ट्रेनिंग: UKPCB (उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) को पिथौरागढ़ के सभी अस्पतालों व पैथ लैब्स की जांच कर 4 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्पताल कर्मचारियों को मेडिकल वेस्ट निस्तारण की ट्रेनिंग देने को कहा गया है।

​3. याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क

​स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा: याचिका में कहा गया कि पिथौरागढ़ में चल रहे करीब 20 पैथ लैब्स का UKPCB में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है।

​अवैध डंपिंग: अस्पतालों और लैब्स का खतरनाक कचरा खुले में फेंका जा रहा है, जिसे मवेशी खा रहे हैं, जिससे बीमारियां फैलने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

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