Thursday, August 6, 2026
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उत्तरकाशी: धराली आपदा को पूरा हुआ एक साल; 70 दिवंगतों की आत्मशांति के लिए हुआ पाठ-पूजा और 101 पौधों का रोपण

उत्तरकाशी: धराली आपदा को पूरा हुआ एक साल; 70 दिवंगतों की आत्मशांति के लिए हुआ पाठ-पूजा और 101 पौधों का रोपण

​उत्तरकाशी (उत्तराखंड): उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा (खेरागाड़/खीरगंगा बेसिन फ्लैश फ्लड) को एक वर्ष पूरा हो गया है। इस त्रासदी की बरसी पर आपदा प्रभावित ग्रामीणों ने खीरगंगा में जान गंवाने वाले 8 स्थानीय ग्रामीणों सहित कुल 70 मृतकों व लापता लोगों की आत्मशांति के लिए एक दिवसीय विशेष पाठ-पूजा और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।

​1. श्रद्धांजलि सभा, पौधरोपण और संकल्प

​पूजा-अर्चना और पाठ: पांच विद्वान पंडितों ने रुद्राष्टक, पितृ शांति पाठ और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

​101 पौधों का रोपण: आपदा स्थल पर श्रद्धांजलि स्वरूप 101 पौधे लगाए गए। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि प्रकृति संरक्षण का संदेश देने और त्रासदी की याद में हर साल 5 अगस्त को यहाँ पौधरोपण किया जाएगा।

​गहरे जख्म: आपदा के एक साल बाद भी कई लापता लोगों का सुराग नहीं लग सका है, जिससे कई परिवार अपनों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए।

​2. पुनर्वास और सरकारी सहायता के आंकड़े

​पुनर्वास की स्थिति: आपदा में बेघर हुए 30 परिवार अब भी किराए के मकानों या रिश्तेदारों के यहाँ रह रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, 21 परिवारों के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, 66 प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 25 अन्य मामलों पर कार्रवाई जारी है।

​दी गई आर्थिक सहायता:

​मृतकों के आश्रितों को सहायता: SDRF मानकों के तहत ₹4 लाख तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹1 लाख (कुल ₹5 लाख प्रति परिवार)।

​पूर्ण क्षतिग्रस्त भवन (115 घर): स्वामियों को ₹5-₹5 लाख की सहायता राशि तथा 6 महीने के लिए ₹4,000/माह (कुल ₹24,000) की किराया सहायता।

​होटल व्यवसायी: प्रभावित होटल स्वामियों को अब तक ₹6.83 करोड़ से अधिक की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।

​घायल: आपदा में 18 लोग घायल हुए थे (5 सामान्य और 13 गंभीर)।

​3. धराली आपदा का घटनाक्रम (5 अगस्त 2025)

​तबाही का दायरा: खीरगंगा नदी में आए फ्लैश फ्लड के कारण मलबे का फैलाव लगभग 2 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में हो गया था, जिससे धराली बाजार पूरी तरह तबाह हो गया था।

​संपत्ति का नुकसान: कल्पेश्वर मंदिर मलबे में दब गया था, जबकि दर्जनों मकान, होटल, दुकानें और सेब के बगीचे पूरी तरह नष्ट हो गए थे।

​4. आजीविका और पुनर्निर्माण की राह

​सेब बागवानी व स्वरोजगार: आपदा के बाद ग्रामीण अब धीरे-धीरे संभल रहे हैं। सेब बागवानी और नकदी फसलों को दोबारा आजीविका का जरिया बनाया जा रहा है।

​युवाओं की पहल: गांव की युवतियां और युवा ट्रेकिंग तथा पर्यटन से जुड़े स्वरोजगार अपनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रहे हैं।

​सुरक्षा कार्य की मांग: ग्रामीणों ने खीरगंगा के किनारों पर मजबूत सुरक्षा दीवार और तटबंध निर्माण की मांग की है ताकि खेती, बागवानी और व्यवसाय सुरक्षित रूप से दोबारा शुरू हो सके।

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