उदयनिधि स्टालिन के 5 प्रमुख विवाद: तृषा पर टिप्पणी से लेकर ‘सनातन’ और शशिकला वाले बयानों तक
उदयनिधि स्टालिन के 5 प्रमुख विवाद: तृषा पर टिप्पणी से लेकर ‘सनातन’ और शशिकला वाले बयानों तक
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन अक्सर अपने तीखे और विवादास्पद बयानों के कारण राजनीतिक व कानूनी विवादों के केंद्र में रहे हैं। हाल ही में अभिनेत्री तृषा से जुड़ी कथित विवादित टिप्पणी के बाद हुई गिरफ्तारी और रिहाई के बीच उनके पुराने विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
1. अभिनेत्री तृषा और मुख्यमंत्री विजय पर टिप्पणी (2026)
मामला: तंजावुर में कावेरी जल विवाद प्रदर्शन के दौरान भाषण देते समय भीड़ द्वारा अभिनेत्री तृषा का नाम लिए जाने पर उदयनिधि ने मंच से एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की।
परिणाम: सत्तारूढ़ ‘तमिझागा वेत्री कड़गम’ (TVK) और भाजपा के विरोध के बाद पुलिस ने उन्हें चेन्नई स्थित आवास से हिरासत में लिया। उदयनिधि ने बयान पर खेद जताने से इनकार करते हुए इसे कानूनी रूप से लड़ने की बात कही है।
2. राज्य गीत और ‘वंदे मातरम्’ पर आपत्ति (2026)
मामला: तमिलनाडु के राज्य गीत को ‘वंदे मातरम्’ के बाद बजाए जाने पर उदयनिधि ने सार्वजनिक आपत्ति दर्ज कराई।
प्रतिक्रिया: DMK ने इसे द्रविड़ पहचान के आत्मसम्मान से जोड़ा, जबकि विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान और विभाजनकारी सोच करार दिया।
3. ‘सनातन उन्मूलन’ बयान (सितंबर 2023)
मामला: ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ में बोलते हुए उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से करते हुए इसे समाप्त करने की बात कही थी।
परिणाम: देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और कई राज्यों में FIR दर्ज की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। हालांकि, 2024 में उदयनिधि ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल जातिगत भेदभाव का विरोध करना था, किसी की धार्मिक आस्था का नहीं।
4. विधानसभा में सनातन पर पुनः बयान
मामला: नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद विधानसभा में अपने पहले ही भाषण में उन्होंने फिर से सनातन धर्म का मुद्दा उठाया।
सफाई: विवाद बढ़ने पर उन्होंने तर्क दिया कि वे किसी के मंदिर जाने या पूजा करने के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि समाज में व्याप्त असमानता के विरोधी हैं।
5. वी.के. शशिकला पर अभद्र टिप्पणी (2021)
मामला: 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने ई. पलानीस्वामी पर तंज कसते हुए कहा था कि सत्ता बचाने के लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित नेता वी.के. शशिकला की “चप्पलें तक पकड़नी पड़ीं।”
प्रतिक्रिया: विपक्षी दलों और महिला संगठनों ने एक वरिष्ठ महिला नेता के प्रति इस भाषा को अत्यंत अभद्र और अमर्यादित बताया था।
