E20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवालों पर सरकार की सफाई: मल्टी-लेयर जांच और सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश
E20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवालों पर सरकार की सफाई: मल्टी-लेयर जांच और सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश
सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) की गुणवत्ता, वाहनों के माइलेज घटने और इंजन खराब होने से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहली बार आधिकारिक रूप से अपनी सफाई पेश की है।
1. गुणवत्ता जांच पर सरकार का दावा
नियमित सैंपलिंग और टेस्ट: सरकार के अनुसार, देश भर के 87,000 से अधिक पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) पर साल में 8 से 12 बार नियमित रूप से फ्यूल क्वालिटी का परीक्षण किया जाता है।
क्लोराइड व सल्फाइड जांच: 2,000 से अधिक फ्यूल सैंपलों की विस्तृत जांच की गई, जिसमें केवल 2 मामलों में क्लोराइड कंटैमिनेशन (दूषण) पाया गया। इन दोनों पेट्रोल पंपों से तुरंत ईंधन की बिक्री रोक दी गई।
2. मल्टी-लेयर क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल की सप्लाई से लेकर पेट्रोल में मिलाने तक मल्टी-लेयर टेस्टिंग की जाती है:
शुरुआत में ही रिजेक्शन: जुलाई 2024 से जून 2026 के बीच एथेनॉल ले जाने वाले 302 टैंकर (लगभग 10,500 किलोलीटर एथेनॉल) गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिन्हें सप्लाई चेन में शामिल होने से पहले ही रिजेक्ट कर दिया गया।
सुरक्षित स्टोरेज: गुणवत्ता जांच पास करने के बाद भी एथेनॉल को अलग स्टोरेज फैसिलिटी में रखा जाता है ताकि किसी भी प्रकार का दूषण (Contamination) न हो।
3. E20 पेट्रोल पर क्यों बढ़ा विवाद?
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और वाहन चालकों के दावों के साथ-साथ विपक्षी दल (विशेषकर आम आदमी पार्टी) भी इस नीति का लगातार विरोध कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से E20 नीति को वापस लेने और सामान्य (प्योर) पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की है।
