उत्तराखंड

उत्तराखंड: संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए NHM की अनूठी पहल, बर्थ वेटिंग होम में तीमारदारों को मिलेगा रोजाना ₹300 डेली वेज

उत्तराखंड: संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए NHM की अनूठी पहल, बर्थ वेटिंग होम में तीमारदारों को मिलेगा रोजाना ₹300 डेली वेज

​उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव और संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की दर बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने एक नई योजना शुरू की है। इसके तहत पर्वतीय व दुर्गम क्षेत्रों से ‘बर्थ वेटिंग होम’ (Birth Waiting Home) में आने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ रुकने वाले तीमारदार (Attendant) को प्रतिदिन 300 रुपये का डेली वेज (दैनिक भत्ता) दिया जाएगा।

​1. क्यों पड़ी इस पहल की जरूरत?

​दुर्गम क्षेत्र और मानसून की चुनौतियां: उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन (Landslide) के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं। ऐसे में प्रसव पीड़ा के समय गर्भवती महिलाओं का अस्पताल पहुँचना बेहद मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है।

​बर्थ वेटिंग होम का कम इस्तेमाल: प्रदेश के सभी जिलों में 52 बर्थ वेटिंग होम संचालित हैं (जहाँ प्रसव तिथि से कुछ दिन पहले गर्भवती महिलाएं आकर रुक सकती हैं)। लेकिन पिछले पूरे साल में मात्र 299 महिलाओं ने ही इसका लाभ उठाया।

​दिहाड़ी का नुकसान: समीक्षा के दौरान सामने आया कि जब कोई महिला घर छोड़कर बर्थ वेटिंग होम आती है, तो उसके साथ आने वाले तीमारदार की दैनिक मजदूरी/दिहाड़ी मारी जाती थी, जिससे परिवार हिचकिचाते थे।

​2. तीमारदारों को भत्ता और सुविधाएं

​एनएचएम उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी के अनुसार:

​₹300 दैनिक वेज: गर्भवती महिला के साथ आने वाले तीमारदार को रहने और खाने की नि:शुल्क व्यवस्था के साथ ही ₹300 प्रतिदिन का भत्ता दिया जाएगा।

​रहने की क्षमता: हर बर्थ वेटिंग होम में एक समय में 3 गर्भवती महिलाओं और उनके तीमारदारों के ठहरने का इंतजाम है।

​वर्ष भर उपलब्ध सुविधा: यह सुविधा सिर्फ मानसून ही नहीं, बल्कि साल भर उपलब्ध रहती है।

​3. अन्य व्यावहारिक चुनौतियां और समाधान

​समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सामने पशुओं (मवेशियों) की देखरेख भी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से वे समय से पहले घर छोड़ने से कतराती हैं।

​इसके समाधान के लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को जागरूक करें तथा उन्हें समय रहते बर्थ वेटिंग होम में शिफ्ट होने के लिए प्रेरित करें।

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