मेरठ में अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: जोन-ए की 16,726 अवैध संरचनाओं को तुरंत खाली कराकर सील करने का आदेश
मेरठ में अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: जोन-ए की 16,726 अवैध संरचनाओं को तुरंत खाली कराकर सील करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में बढ़ते अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों के मामलों पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने जोन-ए में चिन्हित 16,726 अवैध संरचनाओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और उन्हें सील करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कार्रवाई से जुड़े मुख्य बिंदु:
शीघ्र सीलिंग और ध्वस्तीकरण: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई का पहला चरण इन परिसरों को खाली कराना और सील करना होना चाहिए। इसके साथ ही अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण की दिशा में भी उचित कदम उठाए जाएंगे।
अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी: अदालत ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अवैध या जर्जर निर्माण के गिरने से कोई हादसा होता है और जनहानि होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। प्रशासन को दिन-रात काम कर इस समस्या का समाधान करने को कहा गया है।
उल्देपुर के लिए न्यायिक आयोग: सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकसित हुई अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया है। यह आयोग यह जांच करेगा कि पिछले 5 वर्षों में मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) क्यों निष्क्रिय रहा और इसमें अधिकारियों की क्या मिलीभगत थी।
अन्य जोनों की रिपोर्ट तलब: अदालत ने निर्देश दिया है कि वर्तमान में केवल जोन-ए की रिपोर्ट सामने आई है, इसलिए अगली सुनवाई में जोन-बी, सी और डी की भी विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश की जाए।
शेष संपत्तियों पर कार्रवाई: उल्देपुर की रिपोर्ट के अनुसार 44 में से 20 अवैध निर्माणों को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है, और अदालत ने शेष 24 संपत्तियों पर भी जल्द कार्रवाई कर उन्हें गिराने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी, जिसमें कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
