दिल्ली में पीएम मोदी के ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल होने पर सियासत गर्म: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
दिल्ली में पीएम मोदी के ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल होने पर सियासत गर्म: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित एक अनोखे ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक भक्ति संगीत और नाइट-क्लब जैसी आधुनिक धुनें और लाइटों का संगम देखने को मिला, जिसमें पीएम मोदी युवाओं के बीच बैठकर ताली बजाते और खंजरी बजाते नजर आए। इस आयोजन को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
भजन क्लबिंग और आयोजन से जुड़ी मुख्य बातें:
नया आध्यात्मिक ट्रेंड: ‘भजन क्लबिंग’ पारंपरिक भजनों और कीर्तनों को आधुनिक संगीत (जैसे टेक्नो बीट्स या गिटार) और नाइट-क्लब जैसी वाइब के साथ पेश करने का एक नया ट्रेंड है, जो युवाओं और जेन-जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पूरी तरह सात्विक इस आयोजन में किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन नहीं होता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती: शुक्रवार को यह आयोजन भारतीय जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष್ಯ में किया गया था। पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा था, “क्या इसे देखते हुए आपने अपने पैर थपथपाए?”
कांग्रेस का तीखा हमला:
प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम में शामिल होने पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री के पास ‘भजन क्लबिंग’ में शामिल होने के लिए तो पूरा समय है, लेकिन चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता और लोकतंत्र को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब देने के लिए उनके पास वक्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी सरकार के सामने मुश्किल सवाल आते हैं, प्रधानमंत्री चुप्पी साध लेते हैं।
भाजपा का पलटवार:
कांग्रेस के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता सीआर केशवन ने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर देश की शानदार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का मजाक उड़ाया है। भाजपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि जूनियर खरगे से इसके अलावा और क्या उम्मीद की जा सकती है, जिन्हें सिर्फ गांधी परिवार की तारीफ करने की आदत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी की लगातार चुनावी हार पर जवाब देने की हिम्मत कांग्रेस नेताओं में है?
