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चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: अंदरूनी मतभेद की खबरों को नकारा, एसआईआर और फॉर्म 6 विवाद पर दिए बिंदुवार जवाब

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: अंदरूनी मतभेद की खबरों को नकारा, एसआईआर और फॉर्म 6 विवाद पर दिए बिंदुवार जवाब

​चुनाव आयोग (ECI) ने अपने भीतर किसी भी प्रकार के अंदरूनी मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म 6 से जुड़े सभी अहम फैसले पूरे आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी व सुखबीर सिंह संधू ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इन तमाम मुद्दों पर अपनी एकजुटता दिखाई है।

​आयोग के स्पष्टीकरण और जवाब से जुड़ी मुख्य बातें:

​फैसलों पर एकमत: आयोग ने मीडिया में आई उन रिपोर्ट्स को खारिज किया जिनमें जोशी और संधू द्वारा आपत्ति जताए जाने की बात कही गई थी। आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया शुरू करने से लेकर अन्य सभी प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय सभी सदस्यों की सहमति से ही लिए गए थे, और सुप्रीम कोर्ट ने भी मूल SIR आदेश को सही ठहराया है।

​फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन: फॉर्म 6 के साथ जुड़े घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) पर उठे सवालों के जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस डिक्लेरेशन को सही ठहरा चुका है। साथ ही, SIR अवधि के बाहर ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के नियमों के तहत ही निर्धारित फॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

​ECINET और IT डिवीजन: डेटाबेस तक पहुंच और पोर्टल के कामकाज को लेकर आयोग ने घोषणा की है कि एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति (जिसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी होगा) ECINET की समीक्षा करेगी। फील्ड अधिकारियों को उनकी कानूनी शक्तियों के आधार पर ‘रोल-बेस्ड एक्सेस’ दिया गया है।

​कार्यप्रणाली में सुधार: आयोग ने अपनी कार्यशैली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए निर्णय लिया है कि अब सभी बैठकों का एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठकों की कार्यवाही के मिनट्स (विवरण) भी जारी किए जाएंगे।

​दावे और आपत्तियों की समय-सीमा बढ़ाई गई: जनता और राजनीतिक दलों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर तक और उनके निपटारे की सीमा 30 नवंबर तक बढ़ा दी है। इसी तरह महाराष्ट्र के लिए यह समय-सीमा क्रमशः 12 अक्टूबर और 10 नवंबर तक बढ़ाई गई है।

​यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल अंदरूनी असहमति और फॉर्म 6 के नियमों का हवाला देकर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग कर रहे हैं और 30 सितंबर को एक बड़ी बैठक की तैयारी में जुटे हैं।

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