Sunday, August 2, 2026
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उत्तराखंड: सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS छात्रों के लिए बदला नियम, 3 साल की अनिवार्य सेवा के बाद ही मिलेगी PG की अनुमति

उत्तराखंड: सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS छात्रों के लिए बदला नियम, 3 साल की अनिवार्य सेवा के बाद ही मिलेगी PG की अनुमति

​उत्तराखंड के राजकीय (सरकारी) मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस (MBBS) करने वाले डॉक्टरों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा नीतिगत फैसला तैयार किया है। नई पॉलिसी के तहत एमबीबीएस पास आउट डॉक्टरों को कम से कम 3 साल तक राज्य के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देना अनिवार्य होगा, उसके बाद ही वे पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के लिए आवेदन कर सकेंगे।

​स्वास्थ्य विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है, जिस पर आगामी कैबिनेट बैठक में मुहर लगने की पूरी संभावना है।

​1. क्यों पड़ी इस नई नीति की जरूरत?

​पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की किल्लत: उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरदराज के इलाकों में लंबे समय से डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।

​पीजी के लिए जल्दी आवेदन: बॉन्ड प्रणाली के तहत एमबीबीएस डॉक्टर पहाड़ी क्षेत्रों में ज्वाइनिंग तो ले लेते थे, लेकिन कुछ ही समय बाद पीजी (PG) परीक्षा की तैयारी और आवेदन कर देते थे।

​कागजों में तैनाती और आधा वेतन: नियम के अनुसार, पीजी करने के दौरान डॉक्टरों को कागजों पर तैनात माना जाता था और सरकार उन्हें आधा वेतन (Half Salary) भी देती थी। इसके चलते अस्पतालों में डॉक्टरों के पद तो भरे दिखते थे, लेकिन धरातल पर मरीज डॉक्टरों की सेवाओं से वंचित रह जाते थे।

​2. स्वास्थ्य महानिदेशक का आधिकारिक बयान

​उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने इस नीति की पुष्टि करते हुए कहा:

​”स्वास्थ्य विभाग ने एक पॉलिसी तैयार की है, जिसे कैबिनेट के सम्मुख रखा जाएगा। राजकीय मेडिकल कॉलेजों से पास आउट एमबीबीएस डॉक्टर जब विभाग में ज्वाइन करते हैं, तो कुछ ही दिनों बाद पीजी के लिए चले जाते हैं, जिससे एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी हो जाती है। नई पॉलिसी के अनुसार ज्वाइनिंग के बाद कम से कम 3 साल तक अनिवार्य सेवा देने के बाद ही उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन की अनुमति दी जाएगी।”

​3. फैसले का प्रभाव और उम्मीदें

​स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: इस फैसले से राज्य के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) विशेषकर पर्वतीय जिलों में स्थायी रूप से डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

​कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार: शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल की अगली बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा, जिसके बाद इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया जाएगा।

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