Saturday, August 1, 2026
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भारत-चीन सीमा पर फिर गुंजेंगी व्यापारिक गतिविधियां: नाथू ला और लिपुलेख दर्रे 6 साल बाद खुले; ‘सिल्क रूट’ से व्यापार शुरू

भारत-चीन सीमा पर फिर गुंजेंगी व्यापारिक गतिविधियां: नाथू ला और लिपुलेख दर्रे 6 साल बाद खुले; ‘सिल्क रूट’ से व्यापार शुरू

​कोरोना महामारी और गलवान घाटी तनाव के बाद लगभग 6 सालों से बंद पड़े नाथू ला (सिक्किम) और लिपुलेख दर्रे (उत्तराखंड) के रास्ते भारत और चीन के बीच सीमा पार व्यापार 1 अगस्त 2026 से आधिकारिक रूप से फिर से बहाल हो गया है। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार और पूर्वोत्तर तथा सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

​1. सिक्किम का ‘नाथू ला दर्रा’ (पुराना सिल्क रूट)

​समय और संचालन: नाथू ला बॉर्डर मई से नवंबर के बीच 6 महीनों के लिए खुला रहेगा। यहां सोमवार से गुरुवार तक स्वीकृत 36 उत्पादों का व्यापार किया जाएगा।

​महिला ITBP पलटन तैनात: सुरक्षा के लिहाज से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने जवानों की संख्या बढ़ाई है। पहली बार सीमा व्यापार में सहयोग और सुरक्षा के लिए महिलाओं की एक पूरी आईटीबीपी पलटन तैनात की गई है।

​आयात-निर्यात का सामान:

​भारत से निर्यात: हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट), हैंडलूम, मसाले, कृषि उपकरण, सूखी सब्जियां, बर्तन और धार्मिक सामान।

​तिब्बत (चीन) से आयात: रेडीमेड कपड़े, जूते, याक के उत्पाद, मक्खन, रजाइयां और बोरेक्स आदि।

​इतिहास: 1962 युद्ध के बाद 44 साल तक बंद रहा यह रूट 6 जुलाई 2006 को दोबारा खुला था, जो 2020 में महामारी के चलते फिर स्थगित कर दिया गया था।

​2. उत्तराखंड का ‘लिपुलेख दर्रा’ (तकलाकोट ट्रेड)

​व्यापारियों का पहला दल रवाना: चीन ने भारत के 20 व्यापारियों को पुरांग (तकलाकोट) जाने की इजाजत दी है। ये व्यापारी पहले बिना किसी नए सामान के जाएंगे ताकि 2019 में कोविड के कारण गोदामों में छूटे अपने पुराने स्टॉक की जांच कर सकें।

​स्थानीय समुदाय को लाभ: पिथौरागढ़ जिले की व्यास, दारमा और चौदास घाटियों के भोंतिया समुदाय के व्यापारी इस व्यापार का नेतृत्व करते हैं। 1962 के बाद बंद हुआ यह मार्ग 1992 में पहली बार बहाल किया गया था।

​3. आर्थिक और कूटनीतिक महत्व

​कोविड-19 और सीमाई तनाव के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली (Confidence Building) की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ है। नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के हाल ही में फिर से शुरू होने के बाद, इन दो प्रमुख व्यापारिक मार्गों का खुलना स्थानीय सीमावर्ती समुदायों की आजीविका को फिर से संजीवनी देगा।

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