Saturday, August 1, 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में भारत का ऐतिहासिक ‘डबल पोडियम’; सोमन राणा को गोल्ड, शुभम जुयाल को सिल्वर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में भारत का ऐतिहासिक ‘डबल पोडियम’; सोमन राणा को गोल्ड, शुभम जुयाल को सिल्वर

​ग्लासगो:

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शनिवार को भारतीय पैरा-एथलीटों ने नया इतिहास रच दिया। पुरुषों के शॉट पुट F57 (Shot Put F57) इवेंट में भारत ने ‘डबल पोडियम’ (एक साथ दो पदक) हासिल किया। सोमन राणा ने देश के लिए ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता, जबकि शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया।

​राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल है।

​1. फाइनल मुकाबले का हाल और थ्रो के आंकड़े

​सोमन राणा (गोल्ड मेडल – 13.40 मीटर):

​सोमन ने पहले ही प्रयास में 13.38 मीटर का शानदार थ्रो किया।

​अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 13.40 मीटर का थ्रो किया, जो अंत तक शीर्ष स्थान पर बना रहा और उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया।

​सोमन के अन्य प्रयास: 13.38m, 13.40m, फाउल, 13.14m, 13.17m और 13.11m।

​शुभम जुयाल (सिल्वर मेडल – 13.28 मीटर):

​शुभम ने पूरे मैच के दौरान बेहतरीन निरंतरता दिखाई।

​उन्होंने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 13.28 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंककर सिल्वर मेडल पक्का किया।

​शुभम के प्रयास: 13.08m, 12.42m, 13.27m, 13.16m, 12.88m और 13.28m।

​सेड्रिक इड्रिस लेकेजो (कैमरून – ब्रॉन्ज मेडल): कैमरून के सेड्रिक ने 12.57 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

​2. दोनों भारतीय वीरों की प्रेरणादायक कहानियां

​सोमन राणा (आर्मी से पैरा-चैंपियन तक का सफर):

​हादसा: भारतीय सेना के पूर्व जवान सोमन राणा साल 2006 में जम्मू-कश्मीर में सेवा के दौरान एक माइन ब्लास्ट (Mine Blast) की चपेट में आकर घायल हो गए थे।

​वापसी: रिहैबिलिटेशन के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पैरा-स्पोर्ट्स को चुना।

​उपलब्धियां: दो बार के पैरालंपियन सोमन इससे पहले एशियन पैरा गेम्स, वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप और नेशनल प्रतियोगिताओं में भी कई मेडल जीत चुके हैं।

​शुभम जुयाल (हादसे को दी मात):

​सपना और हादसा: रुड़की में जन्मे शुभम का सपना सेना में अफसर बनने का था। हालांकि, 2022 में एक दर्दनाक बाइक दुर्घटना में उन्होंने अपना एक पैर गंवा दिया।

​पैरा-स्पोर्ट्स में सफलता: इसके बाद वह सेना के ‘पैरालंपिक स्पोर्ट्स नोड’ से जुड़े और कड़ी मेहनत के दम पर F57 कैटेगरी के बेहतरीन एथलीट बने।

​उपलब्धियां: उन्होंने नेशनल पैरा एथलेटिक्स, खेलो इंडिया पैरा गेम्स और इंडियन ओपन में पदक जीतने के बाद अब राष्ट्रमंडल खेलों के बड़े मंच पर सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

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