जलवायु परिवर्तन की मार: पश्चिमी यूरोप में तेजी से बढ़ रहा तापमान; स्पेन और फ्रांस में वनाग्नि से 2 लाख लोग विस्थापित
जलवायु परिवर्तन की मार: पश्चिमी यूरोप में तेजी से बढ़ रहा तापमान; स्पेन और फ्रांस में वनाग्नि से 2 लाख लोग विस्थापित
स्पेन के सरकारी मौसम विज्ञान विभाग (AEMET) के प्रवक्ता और जलवायु विशेषज्ञ रूबेन डेल कैंपो के अनुसार, पश्चिमी यूरोप दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। इसके चलते इस क्षेत्र में हीटवेव (लू) की बारंबारता और भीषणता बढ़ी है, जिससे स्पेन और फ्रांस के जंगलों में आग (Wildfires) लगने की विनाशकारी स्थितियां पैदा हो गई हैं।
1. स्पेन में भीषण गर्मी और जलवायु रिकॉर्ड
जुलाई 2026 में चौथी हीटवेव: जुलाई के अंत में स्पेन इस साल की चौथी हीटवेव से जूझ रहा था, जहाँ देश के कई हिस्सों में तापमान 42°C तक पहुँच गया।
इतिहास का दूसरा सबसे गर्म जून: एईएमईटी (AEMET) के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 स्पेन के इतिहास (1961 से रखे जा रहे रिकॉर्ड) का दूसरा सबसे गर्म और तीसरा सबसे शुष्क (Driest) जून महीना दर्ज किया गया।
समय से पहले गर्मी: मई के अंत तक ही स्पेन के कई हिस्सों में पारा 35°C को पार कर गया था।
2. जंगलों में भीषण आग और 2 लाख लोग बेघर
अत्यधिक गर्मी और सूखे के कारण स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में वनाग्नि की घटनाएं बेकाबू हो गई हैं:
विस्थापन: स्पेन और फ्रांस (खासकर बोर्डो और मैड्रिड के आसपास के इलाकों) में फैल रही आग के कारण अब तक लगभग 2 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।
छह गुना अधिक तबाही: स्पेन के इकोलॉजिकल ट्रांजिशन मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 के अंत तक 1.80 लाख हेक्टेयर (1,80,000 हेक्टेयर) ज़मीन आग की चपेट में आ चुकी है, जो कि 2025 में इसी समय दर्ज 29,817 हेक्टेयर की तुलना में छह गुना अधिक है।
3. आग लगने का वैज्ञानिक कारण: ‘गर्मी और सूखा’
मौसम विशेषज्ञ रूबेन डेल कैंपो ने समझाया कि अत्यधिक गर्मी किस तरह आग को बढ़ावा देती है:
”गर्मी जल्दी शुरू होने और बारिश न होने से सूखा समय से पहले आ जाता है। इससे जंगलों की झाड़ियां और बारीक घास बहुत तेजी से सूख जाती हैं। सूखी ऑर्गेनिक घास ईंधन की तरह काम करती है, जिससे आग लगते ही उसे शुरुआती चरण में नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है।”
4. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट
2°C का इजाफा: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, 1976 की ऐतिहासिक हीटवेव के बाद से पूरे यूरोप का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
जलवायु परिवर्तन से सीधा संबंध: विशेषज्ञों और WMO का मानना है कि गर्मियों के औसत तापमान में यह निरंतर वृद्धि मुख्य रूप से मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का परिणाम है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगस्त के पूरे महीने में वनाग्नि का खतरा बना रहेगा और अब फायर मैनेजमेंट (Fire Management) प्रणालियों को लंबी और अत्यधिक शुष्क गर्मियों के अनुकूल खुद को ढालना होगा।
