अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप ने दिए नए सैन्य हमले के निर्देश, वैश्विक बाजार में उछलीं कच्चे तेल की कीमतें
अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप ने दिए नए सैन्य हमले के निर्देश, वैश्विक बाजार में उछलीं कच्चे तेल की कीमतें
वॉशिंगटन से आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक और बड़े सैन्य हमले की तैयारी के निर्देश दिए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान को अमेरिका की शर्तों पर बातचीत और आत्मसमर्पण (Surrender) के लिए मजबूर करने के इरादे से की जा रही है।
1. प्रमुख अपडेट्स और बयानों की मुख्य बातें
ट्रंप का आक्रामक रुख: कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने साफ कहा— “हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे। और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।”
ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की योजना: CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरान के बिजली स्टेशनों और पेट्रोलियम रिफाइनरियों जैसे ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता: नागरिक व मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि जानबूझकर असैन्य ऊर्जा ढांचे (Civilian Infrastructure) को निशाना बनाना युद्ध अपराध (War Crimes) की श्रेणी में आ सकता है।
व्हाइट हाउस का बयान: प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि ईरान को तब तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी, जब तक वह सार्थक तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आता।
2. वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर असर
क्रूड ऑयल $86 पार: सम्भावित हमलों की खबरों के बाद WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) कच्चे तेल की कीमत 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सप्लाई बाधित: 28 फरवरी से जारी इस युद्ध के दौरान ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मार्ग में रुकावट डालने से कच्चे तेल, एलएनजी (LNG) और उर्वरक की आपूर्ति वैश्विक स्तर पर प्रभावित हुई है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव: ईंधन, खाद्य पदार्थों और आवास की लागत बढ़ने से अमेरिका में आम जनता पर बोझ बढ़ा है, जिसका असर आगामी मध्यावधि चुनावों पर देखने को मिल सकता है।
3. दोनों देशों के बीच भरोसे का संकट
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद कूटनीतिक बातचीत लगभग ठप हो गई है। जहां ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उन्हें ईरानी नेतृत्व पर भरोसा नहीं है, वहीं तेहरान का आरोप है कि अमेरिका अपने पहले किए गए वादों से मुकर गया है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
