नीट प्रदर्शन में पैलेट गन चलाने वाले RAF जवानों की पहचान, CRPF अगले हफ्ते सौंपेगी जांच रिपोर्ट
नीट प्रदर्शन में पैलेट गन चलाने वाले RAF जवानों की पहचान, CRPF अगले हफ्ते सौंपेगी जांच रिपोर्ट
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। पैलेट गन चलाने वाले रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की पहचान कर ली गई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की जांच टीम इस मामले पर रिपोर्ट तैयार कर रही है, जो अगले एक सप्ताह के भीतर सौंपी जा सकती है।
जांच में किन पहलुओं पर दिया जा रहा है जोर?
शुरुआत में प्रशासन द्वारा पैलेट गन के प्रयोग से इनकार किया गया था, लेकिन कई प्रदर्शनकारी छात्रों के गंभीर रूप से घायल होने की तस्वीरें और शिकायतें सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। जांच आयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की पड़ताल कर रहा है:
परिस्थितियाँ: किन आपातकालीन परिस्थितियों में जवानों को पैलेट गन का इस्तेमाल करना पड़ा?
स्थान: प्रदर्शन स्थल पर किन-किन विशिष्ट जगहों पर पैलेट गन चलाई गई?
SOP का उल्लंघन: क्या हथियारों का इस्तेमाल मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार किया गया था या यह गैर-कानूनी था?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से हुई पहचान
आरएएफ अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन वीडियो और तस्वीरों का संज्ञान लिया, जिनमें नीले रंग की वर्दी पहने जवान लाठीचार्ज करते और बंदूकें थामे दिख रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य वीडियो में उग्र प्रदर्शनकारियों द्वारा जवानों को घेरकर हमला करते भी देखा गया है।
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान जवानों के आचरण की निष्पक्ष जांच के लिए सभी निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर क्या हैं नियम?
आरएएफ के दंगा-रोधी हथियारों के बेड़े में 12-बोर पंप-एक्शन गन (पैलेट गन) शामिल होती है। हालांकि, नियमों (SOP) के अनुसार इसका इस्तेमाल केवल अत्यंत दुर्लभ और गंभीर परिस्थितियों में ही किया जा सकता है—विशेषकर तब जब जवानों या आम जनता की जान को कोई सीधा और गंभीर खतरा हो।
उल्लेखनीय है कि इस हिंसा में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पैलेट गन से घायल हुए एक छात्र को मीडिया के सामने लेकर आए थे। अब CRPF की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित जवानों पर आगे की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
