हरतालिका तीज 2026: जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत की विधि, कथा और महत्व
हरतालिका तीज 2026: जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत की विधि, कथा और महत्व
सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए सबसे खास और कठिन व्रतों में से एक हरतालिका तीज का पर्व इस वर्ष 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
1. हरतालिका तीज 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां
तृतीया तिथि का आरंभ: 13 सितंबर 2026 को सुबह 7:08 बजे
तृतीया तिथि की समाप्ति: 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:06 बजे
प्रातःकाल पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:06 बजे से 7:06 बजे तक
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त (संध्या काल): शाम 6:28 बजे से रात 9:00 बजे तक
2. क्यों पड़ा इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’?
कथा के अनुसार, जब राजा हिमवान ने माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया था, तब माता की एक सखी (प्रिया) उन्हें घने जंगल में ले गईं ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप कर सकें। सखियों द्वारा ‘हरण’ कर एकांत में ले जाने और तप करने के कारण इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा।
3. व्रत के नियम और पूजा की विधि
निर्जला व्रत: यह व्रत 24 घंटे का पूर्णतः निर्जला (बिना पानी के) होता है। इस दिन सोलह श्रृंगार करने और रात्रि जागरण का विशेष विधान है।
संकल्प मंत्र: सूर्योदय से पहले स्नान कर नए वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लेते हुए यह मंत्र बोलें—
”उमा महेश्वर सायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये।”
प्रतिमा और पूजन सामग्री: इस दिन बालू (रेत) या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है। पूजा में बेलपत्र, फूल, पंचामृत, 16 प्रकार के पत्ते, और माता गौरी के लिए सुहाग का सामान (सिंदूर, चूड़ियां, चुनरी आदि) अर्पित किया जाता है।
4. व्रत का पारण
पूजा और रात्रि जागरण के बाद अगले दिन सुबह स्नान कर पुनः माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करें और सुहाग का आशीर्वाद लें। इसके बाद खीरे का प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है।
