BRICS Summit 2026: Day-1 का पूरा हिसाब — घोषणा पास, मोदी-शी मुलाकात, और ग्लोबल साउथ का जोरदार संदेश
BRICS Summit 2026: Day-1 का पूरा हिसाब — घोषणा पास, मोदी-शी मुलाकात, और ग्लोबल साउथ का जोरदार संदेश
12 सितंबर 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का पहला दिन खत्म हो चुका है। शाम तक सबसे बड़ी खबर आ चुकी थी — न्यू दिल्ली घोषणा 2026 सर्वसम्मति से पारित। 140 पैराग्राफ वाला दस्तावेज, थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”।
ईरान और यूएई के बीच मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर मई से चले आ रहे मतभेदों को भारत ने आखिरी पल तक सुलझाया। रात भर चली बातचीत के बाद सुबह तक सहमति बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ऐलान किया — “कोई सदस्य आपत्ति नहीं उठाया।”
ये सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, भारत की डिप्लोमैटिक जीत थी।
दिन-1 पर क्या-क्या हुआ?
सुबह-दोपहर
मोदी ने पुतिन, शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, दक्षिण अफ्रीका के सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के प्रबोवो सुबिआंतो, यूएई के अबू धाबी क्राउन प्रिंस और अन्य नेताओं का स्वागत किया।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम और भारत इनोवेट्स एक्सपो में नेता साथ-साथ चले। मोदी-पेजेशकियान हाथ थामे दिखे — एकता का सिग्नल।
मोदी-पुतिन की 45 मिनट की द्विपक्षीय बैठक हुई। व्यापार लक्ष्य ($100 बिलियन सालाना 2030 तक), डिफेंस (S-400, ब्रह्मोस), एनर्जी और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बात। पुतिन ने मोदी को रूस बुलाया, मोदी ने स्वीकार किया।
दोपहर-शाम
मुख्य सत्र शुरू। मोदी ने कहा — “ग्लोबल साउथ आज संकट की फ्रंट रो में है, लेकिन फैसले की बैक रो में। पिरामिड ऑफ प्रिविलेज को प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप में बदलना होगा।”
शी जिनपिंग ने ब्रिक्स को उभरते बाजारों का सबसे प्रभावशाली प्लेटफॉर्म बताया और कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं।
न्यू दिल्ली घोषणा सर्वसम्मति से पास। नेता तालियां बजाते दिखे।
शाम
मोदी-शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात। शी ने कहा — भारत-चीन रिश्तों को रणनीतिक और लंबी अवधि के नजरिए से देखना चाहिए। मोदी ने भारत की चेयरशिप में चीन के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। ये शी की 7 साल बाद भारत यात्रा थी।
नेताओं ने पेड़ लगाया, ग्रुप फोटो खिंचवाई और शाम को गाला डिनर हुआ।
चीन 2027 में चेयरमैन बनेगा। मोदी ने “कंटिन्युइटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म” (ट्रॉयका) का प्रस्ताव रखा ताकि इनिशिएटिव अटकें नहीं।
न्यू दिल्ली घोषणा के बड़े पॉइंट्स (अभी तक का अपडेट)
आतंकवाद — पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025, 26 मौतें) की सबसे कड़ी निंदा। क्रॉस-बॉर्डर आतंक, फाइनेंसिंग और सेफ हेवन का साफ जिक्र। डबल स्टैंडर्ड खारिज।
यूएन सुधार — सुरक्षा परिषद समेत व्यापक सुधार। चीन-रूस ने भारत और ब्राजील की “बड़ी भूमिका” का समर्थन दोहराया।
ट्रेड — एकतरफा टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर और यूरोप के CBAM (कार्बन बॉर्डर टैक्स) का विरोध। WTO सुधार की मांग।
मध्य पूर्व — तनाव पर गहरी चिंता, अधिकतम संयम का आह्वान। गाजा में सीजफायर, मानवीय मदद और दो-राज्य समाधान का समर्थन। किसी देश का नाम नहीं।
पेमेंट्स — स्थानीय मुद्राओं में तेज और सस्ते क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट। कोई कॉमन करेंसी नहीं।
अन्य — क्रिटिकल मिनरल्स, एआई गवर्नेंस, फूड-एनर्जी सिक्योरिटी, न्यूक्लियर सेफ्टी, ग्लोबल वैल्यू चेन प्लान, मेंटल हेल्थ नेटवर्क (NIMHANS), ग्रोथ टास्क फोर्स।
स्कोरकार्ड: किसने क्या पाया?
भारत — सबसे बड़ा विजेता। पहलगाम निंदा + यूएनएससी सपोर्ट + मतभेद सुलझाकर सर्वसम्मति।
ब्राजील — भारत के साथ यूएन वाला फायदा।
चीन-रूस — ग्लोबल साउथ प्लेटफॉर्म मजबूत, अपनी लाइन बरकरार।
ईरान — नाम लिए बिना संयम की भाषा। राहत।
यूएई — समझौता करके आगे बढ़ा।
किसे मिर्ची लगी?
साफ है — पश्चिम, खासकर यूरोपीय संघ और अमेरिका।
CBAM पर हमला, यूएन-IMF सुधार की मांग, एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों का विरोध — ये सब मौजूदा पावर स्ट्रक्चर को चुनौती देते हैं। स्थानीय मुद्रा पेमेंट्स का जोर डॉलर की भूमिका को धीरे-धीरे कम करने का संकेत है।
ब्रिक्स अब सिर्फ बातचीत का क्लब नहीं। 40% से ज्यादा आबादी और बड़ी आर्थिक ताकत वाला ये समूह नियम भी बनाना चाहता है।
अभी तक का सबसे बड़ा संदेश — ग्लोबल साउथ अब सिर्फ सुनने वाला नहीं, बोलने और नियम लिखने वाला बनना चाहता है।
13 सितंबर को सम्मेलन का दूसरा दिन है। आउटरीच सेशन और और डिटेल्स आने वाले हैं। लेकिन Day-1 ने साफ कर दिया — दिल्ली ने बाजी मार ली है।
