उत्तराखंड में विधायक निधि खर्च करने की रफ्तार सुस्त: RTI रिपोर्ट में खुलासा, सीएम धामी से आगे रहे 4 मंत्री; टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय सबसे फिसड्डी
उत्तराखंड की राजनीति में हलचल: विधायक निधि खर्च करने के मामले में आरटीआई रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, 5 मंत्रियों का प्रदर्शन मुख्यमंत्री से भी कमजोर
उत्तराखंड विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल पूरा होने में अब कुछ ही महीने शेष बचे हैं, लेकिन राज्य के जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास कार्यों पर विधायक निधि (MLA Local Area Development Fund) खर्च करने की रफ्तार बेहद सुस्त बनी हुई है। ग्रामीण विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा आरटीआई (RTI) के तहत सामने आई एक विस्तृत रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि विधायक निधि के उपयोग के मामले में राज्य के 4 मंत्री मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आगे रहे, जबकि 5 मंत्रियों का प्रदर्शन उनसे भी पीछे रहा है।
1. मंत्रिमंडल का प्रदर्शन: सीएम धामी से आगे और पीछे कौन?
मंत्रिमंडल के भीतर विधायक निधि के खर्च का आंकड़ा इस प्रकार है:
शीर्ष पर मंत्री: रुड़की के विधायक एवं मंत्री प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत खर्च के साथ मंत्रिमंडल में सबसे आगे हैं। उनके बाद सितारगंज के विधायक व मंत्री सौरभ बहुगुणा 72 प्रतिशत के साथ दूसरे और चौबट्टाखाल के विधायक व कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज 68 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
चौथा और पांचवां स्थान: राजपुर रोड के मंत्री खजान दास 66.11 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर हैं, जबकि चंपावत के विधायक एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 65.61 प्रतिशत खर्च कर पांचवें पायदान पर हैं।
अन्य मंत्री और सबसे फिसड्डी: गणेश जोशी (65.45%), राम सिंह कैड़ा (62%), रेखा आर्य (60%), और सुबोध उनियाल (57%) के बाद, श्रीनगर से भाजपा विधायक एवं मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मात्र 37 प्रतिशत खर्च के साथ मंत्रियों में सबसे फिसड्डी (दसवें स्थान पर) रहे हैं।
2. विधायकों का हाल: किसने किया सबसे कम और किसने सबसे ज्यादा इस्तेमाल?
सबसे खराब प्रदर्शन: पूरे प्रदेश के विधायकों में सबसे कम निधि खर्च करने का रिकॉर्ड भाजपा के टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय के नाम है, जो मात्र 30 प्रतिशत ही राशि खर्च कर पाए हैं। इसके अलावा डॉ. धन सिंह रावत (37%), रेणु बिष्ट (44%), प्रीतम सिंह (51%), सुरेश गड़िया (52%), और खुशाल सिंह (53%) जैसे विधायक भी निचले पायदान पर हैं।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले अन्य विधायक: फुरकान अहमद, रवि बहादुर, सरवत करीम और मदन सिंह बिष्ट (76%), स्व. चंदन राम दास व महेश सिंह जीना (75%), तथा उमेश शर्मा, गोपाल सिंह व सुमित हृदयेश (74%) ने अपनी निधि का बेहतर उपयोग किया है। बंशीधर भगत, मदन कौशिक और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी 68% से 72% के बीच निधि खर्च की है।
3. आरटीआई से सामने आए मुख्य वित्तीय आंकड़े
काशीपुर के आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) को ग्रामीण विकास आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक:
कुल उपलब्ध निधि (2022-23 से जून 2026): ₹1,66,400 लाख (यानी ₹1,664 करोड़)।
कुल खर्च राशि: ₹1,09,129.19 लाख।
बची हुई राशि: राज्य के विधायकों द्वारा कुल उपलब्ध बजट का केवल 66 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च किया जा सका है, जबकि 34 प्रतिशत धनराशि अभी भी उपयोग न होने के कारण अटकी हुई है।
4. चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में उठ रहे सवाल
कार्यकाल समाप्त होने और आगामी विधानसभा चुनावों के नजदीक होने के कारण ये आंकड़े बेहद संवेदनशील बन गए हैं। विपक्ष और स्थानीय जनता अब इस बात पर सवाल उठा रही है कि जब जनता के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट पहले से उपलब्ध था, तो उसे धरातल पर उतारने में इतनी सुस्ती क्यों बरती गई। 34% बजट का अप्रयुक्त रह जाना प्रशासनिक सुस्ती और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की ओर इशारा करता है, जो आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
