Saturday, September 12, 2026
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उत्तराखंड की राजनीति गरमाई: पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर ईडी के छापे के बाद कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

उत्तराखंड की राजनीति गरमाई: पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर ईडी के छापे के बाद कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

​उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक पारा काफी हाई हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व OSD एवं PA रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद से सूबे में सियासी भूचाल आ गया है। इस कार्रवाई से बीजेपी को जहां हमलावर होने का मौका मिल गया है, वहीं कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दे रही है।

​1. पूरा मामला क्या है? (ED Raid & Allegations)

​छापेमारी और बरामदगी: 10 सितंबर को ईडी ने UKSSSC की 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के मामले में चंदन सिंह जीना के घर पर छापा मारा।

​करोड़ों की संपत्ति: जांच एजेंसी के अनुसार, छापे के दौरान उनके घर से 32 लाख रुपये नकद, लाखों रुपये की लग्जरी घड़ियां और सोना समेत कुल करीब 1.32 करोड़ रुपये की संपत्ति/माल बरामद हुआ है।

​ओएमआर (OMR) शीट से छेड़छाड़ का आरोप: आरोप है कि UKSSSC का सचिव रहते हुए चंदन सिंह जीना ने VPDO परीक्षा-2016 की OMR शीट से कथित छेड़छाड़ करवाई थी। सुरक्षित रखी OMR शीट को निजी आवास तक पहुंचाने और खाली गोलों को निजी एजेंसी के कर्मचारियों से भरवाने का गंभीर आरोप है।

​2. कांग्रेस का पक्ष और तीखी प्रतिक्रियाएं:

​गणेश गोदियाल (प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेस):

​गोदियाल ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और चुनावों को प्रभावित करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव नजदीक आते हैं, तभी ऐसी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है।

​उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में जब यह मामला सामने आया था, तब तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने खुद इसका संज्ञान लेते हुए परीक्षा निरस्त की थी और जांच बिठाई थी।

​हरीश रावत के इस्तीफे की खबरों का खंडन करते हुए गोदियाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी को असहज न करने की बात कही थी, उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और उनकी कांग्रेस के प्रति निष्ठा अडिग है।

​करन माहरा (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस):

​माहरा ने सवाल उठाया कि जो प्रकरण 2016 का है, उस पर 10 साल बाद अचानक कार्रवाई क्यों की जा रही है?

​उन्होंने नोटबंदी का हवाला देते हुए तंज कसा कि यदि 2016 में कोई रकम ली गई थी, तो क्या वह पुराने नोटों के रूप में 10 साल तक वैसे ही पड़ी रही?

​उन्होंने कहा कि दशकों की नौकरी और बचत से जुड़ी संपत्तियों को जबरन अपराध से जोड़ना गलत है और इसका उद्देश्य सिर्फ हरीश रावत पर दबाव बनाना है।

​संजय नेगी (ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख, रामनगर):

​हरीश रावत के करीबी संजय नेगी ने भी बयान दिया कि रावत कांग्रेस के मजबूत स्तंभ हैं और चुनाव नजदीक आते ही उनके करीबियों को निशाना बनाकर उन पर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

​इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई में जुटी हैं, वहीं कांग्रेस इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने का हथकंडा बता रही है।

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