BCCI का बड़ा कदम: सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के नियमों में हो सकता है सख्त बदलाव, अब फिटनेस और न्यूनतम मैचों की उपलब्धता बनेगी शर्त
BCCI का बड़ा कदम: सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के नियमों में हो सकता है सख्त बदलाव, अब फिटनेस और न्यूनतम मैचों की उपलब्धता बनेगी शर्त
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) खिलाड़ियों की फिटनेस, कार्यभार प्रबंधन (Workload Management) और मैदान पर उनकी नियमित उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए अपने सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के नियमों में कड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। इस नए प्रस्ताव के लागू होने से खिलाड़ियों के लिए करोड़ों रुपये का अनुबंध हासिल करना और बनाए रखना केवल अच्छे प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि उनकी निरंतर उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।
1. क्या है बीसीसीआई का नया प्रस्ताव?
प्रदर्शन के साथ फिटनेस और उपलब्धता अनिवार्य: अब तक खिलाड़ियों को मुख्य रूप से उनके शानदार प्रदर्शन और सीनियरटी के आधार पर ए+, ए, बी या सी ग्रेड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट दिए जाते थे। लेकिन नए नियमों के तहत ‘मैच के लिए उपलब्धता’ को सबसे मुख्य शर्त बनाया जा रहा है।
न्यूनतम मैचों की सीमा: बोर्ड एक निश्चित न्यूनतम मैच सीमा तय करने पर विचार कर रहा है, जिसे पूरा करने वाले खिलाड़ी ही सालाना अनुबंध के दायरे में आ सकेंगे।
2. नियमों को सख्त करने की मुख्य वजह:
चोटिल होने के कारण बाहर रहना: पिछले कुछ समय में देखा गया है कि भारतीय टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी लगातार चोटिल होने या वर्कलोड के चलते अहम दौरों और महत्वपूर्ण मैचों से बाहर हो जाते हैं।
राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को प्राथमिकता: बोर्ड इस बात को लेकर चिंतित है कि शीर्ष स्तर के खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के लिए लगातार उपलब्ध रहें और अनियोजित ब्रेक से बचें। इसी समस्या से निपटने के लिए यह कड़ा रुख अपनाया जा रहा है।
3. फिलहाल किस स्थिति में है यह योजना?
शुरुआती चरण: बीसीसीआई सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और बोर्ड के भीतर इस पर आंतरिक विचार-विमर्श जारी है।
अंतिम निर्णय बाकी: बोर्ड इस बात का आकलन कर रहा है कि व्यावहारिक रूप से इस नियम को किस प्रकार लागू किया जाए। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन यदि यह प्रस्ताव पास होता है तो भारतीय क्रिकेटरों के लिए अनुशासन और फिटनेस के पैमाने और अधिक कड़े हो जाएंगे।
