प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता: 7 साल बाद हुई मुलाकात, ब्रिक्स समिट में आतंकवाद और पश्चिम एशिया संकट पर बनी सहमति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता: 7 साल बाद हुई मुलाकात, ब्रिक्स समिट में आतंकवाद और पश्चिम एशिया संकट पर बनी सहमति
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई है। गलवान झड़प के बाद पिछले सात वर्षों में चीनी राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है।
1. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के मुख्य बिंदु:
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता: इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल भी शामिल रहे, जिन्होंने दोनों देशों के बीच पारस्परिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
पीएम मोदी का स्वागत भाषण: प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति जिनपिंग का स्वागत करते हुए ब्रिक्स समिट में उनके सकारात्मक वक्तव्य के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे दोनों देशों को द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का एक और महत्वपूर्ण अवसर मिला है।
2. पश्चिम एशिया संकट पर चीन का रुख:
शांति और स्थिरता की पहल: चीनी समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ के हवाले से राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन मिडिल ईस्ट और खाड़ी (गल्फ) क्षेत्र में शांति व स्थिरता बहाल करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
क्षेत्रीय नुकसान पर चिंता: चीनी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि इस युद्ध की वजह से पूरे इलाके के लोगों को भारी क्षति उठानी पड़ी है, जो कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के भी विरुद्ध है।
3. ब्रिक्स साझा बयान में आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई का संकल्प:
शिखर सम्मेलन के दौरान जारी साझा बयान में आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद कड़े रुख अपनाए गए हैं:
पहलगाम हमले की भर्त्सना: बयान में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।
सीमा पार आतंकवाद और टेरर फंडिंग: ब्रिक्स देशों ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) और उन्हें मिलने वाले सुरक्षित पनाहगाहों को नेस्तनाबूद करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance): घोषणा में इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता या संस्कृति से नहीं जोड़ा जा सकता। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए इससे निपटने में किसी भी प्रकार के दोहरे मानकों को पूरी तरह से खारिज किया गया है।
