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खराब मौसम की चेतावनी के बीच माता वैष्णो देवी यात्रा अस्थाई रूप से स्थगित, त्रिकुटा पहाड़ियों पर भूस्खलन

खराब मौसम की चेतावनी के बीच माता वैष्णो देवी यात्रा अस्थाई रूप से स्थगित, त्रिकुटा पहाड़ियों पर भूस्खलन

​कटरा (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश और खराब मौसम के मद्देनजर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने शनिवार को सूचित किया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी को देखते हुए 19 जुलाई से माता वैष्णो देवी की यात्रा को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया है।

​प्रशासन और श्राइन बोर्ड ने यह कदम तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए उठाया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में क्षेत्र में और अधिक भारी बारिश, आंधी-तूफान तथा संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ (फ़्लैश फ्लड) और भूस्खलन की आशंका जताई है।

​हिमकोटी के पास भूस्खलन; बैटरी कार सेवा ठप

​इससे पहले 8 जुलाई को भी रियासी जिले के कटरा कस्बे में स्थित त्रिकुटा पहाड़ियों के मुख्य मार्ग पर बारिश की वजह से भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ था। भारी बारिश के कारण यह भूस्खलन मंदिर की ओर जाने वाले नए मार्ग पर ‘हिमकोटी’ के पास हुआ।

​बैटरी कार सेवा निलंबित: मलबे के कारण मार्ग पर बैटरी कार सेवा को अस्थाई रूप से रोकना पड़ा था।

​अप्रभावित रहे थे श्रद्धालु: हालांकि, उस समय यात्रा पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी और सैकड़ों तीर्थयात्री खराब मौसम के बावजूद लगातार भवन की ओर बढ़ते रहे।

​श्राइन बोर्ड की त्वरित कार्रवाई: भूस्खलन की सूचना मिलते ही श्राइन बोर्ड ने तुरंत अपने कर्मचारियों और आधुनिक मशीनों को काम पर लगा दिया था ताकि मलबे को हटाकर रास्ता साफ किया जा सके।

​लेकिन अब, लगातार बिगड़ते मौसम और रेड अलर्ट की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए यात्रा को पूरी तरह से रोकने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने कटरा पहुंचे श्रद्धालुओं से धैर्य रखने और केवल आधिकारिक माध्यमों से मिलने वाली जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।

​आस्था का केंद्र: मां वैष्णो देवी

​हिंदू धर्म में शक्ति का प्रतीक मानी जाने वाली माता वैष्णो देवी को वैष्णवी, त्रिकुटा और शेरावली के नाम से भी पुकारा जाता है। इस पावन गुफा मंदिर में माता किसी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि स्वयं तीन प्राकृतिक पिंडियों के रूप में विराजमान हैं, जिन्हें देवी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का रूप माना जाता है।

 

​त्रिकुटा पर्वत श्रृंखला में 5,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस दरबार तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कटरा बेस कैंप से 13 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई (या हेलीकॉप्टर सेवा) तय करनी पड़ती है। मान्यताओं के अनुसार, मां वैष्णो देवी भगवान विष्णु से जुड़ी एक तपस्वी, शाकाहारी और कुंवारी देवी हैं, जो ‘महादेवी’ या एक दिव्य ‘माता’ के रूप में अपने भक्तों के कष्टों को हरकर उन्हें मनवांछित वरदान देती हैं। इन्हें उत्तर भारत की क्षेत्रीय परंपराओं में ‘सात बहनों’ में सबसे बड़ी बहन के रूप में भी जाना जाता है।

​नोट: प्रशासन के मुताबिक, जैसे ही मौसम की स्थिति में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों की समीक्षा पूरी हो जाएगी, यात्रा को दोबारा सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाएगा। तब तक यात्रियों को जल स्रोतों और पहाड़ी ढलानों से दूर सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

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