Monday, September 7, 2026
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दान के पैसे से VIP आवाभगत: बदरी-केदार मंदिर समिति की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में, विधायक और भाजपा नेता नहीं दे पाए बिल के सबूत

दान के पैसे से VIP आवाभगत: बदरी-केदार मंदिर समिति की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में, विधायक और भाजपा नेता नहीं दे पाए बिल के सबूत

​देहरादून: बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) में दान के पैसों से वीआईपी मेहमानों की खातिरदारी करने का मामला अब और गहरा गया है। इस पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट खुद ही सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ जांच में होटल और रेस्टोरेंट के दस्तावेजों का सत्यापन अभी जारी होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ इस मामले से जुड़े भाजपा नेताओं को अपनी सफाई देने का मौका तक नहीं दिया गया। इस आधी-अधूरी जांच के आधार पर ही मंदिर समिति के तत्कालीन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी ठहरा दिया गया है।

​बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर से जुड़े दान चोरी के इस नए विवाद ने कई अन्य मामलों को भी हवा दे दी है। हाल ही में केदारनाथ धाम में वीआईपी अतिथियों, विशेषकर भाजपा नेताओं पर लाखों रुपये खर्च करने की बात सामने आई थी, जिस पर मंदिर समिति ने आंतरिक जांच कराई है।

​जांच के मुख्य बिंदु और अधूरे बयान

​जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीईओ विजय थपलियाल, तत्कालीन व्यवस्थापक और मुख्य प्रभारी अधिकारी को वित्तीय अनियमितता के लिए जिम्मेदार तो माना गया है, लेकिन रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है कि कई अहम बिंदुओं पर अभी जांच होना बाकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन भाजपा नेताओं के वीआईपी दौरों पर यह लाखों रुपये खर्च किए गए, जांच अधिकारियों ने उनके बयान तक दर्ज नहीं किए।

​केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि मंदिर समिति की तरफ से बिल भुगतान को लेकर उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया और न ही उनका कोई बयान लिया गया।

​नेताओं के दावों पर उठे सवाल, नहीं मिले बिल के सबूत

​इस पूरे मामले में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। इससे पहले वह लगातार दावा कर रही थीं कि केदारनाथ में रुकने का खर्च उन्होंने खुद वहन किया था, लेकिन जब उनसे भुगतान किए गए बिल की कॉपी मांगी गई, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। अब उन्होंने मान लिया है कि उनके पास खर्च के भुगतान का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है।

​यही स्थिति कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी की भी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वह भी अपने स्तर पर किए गए बिल भुगतान की कोई पर्ची या सबूत पेश नहीं कर पाई हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन नेताओं ने वाकई भुगतान किया था या फिर इनके दावे खोखले हैं।

​सरकार के लिए सिरदर्द बना मामला, भाजपा अध्यक्ष ने दी सफाई

​प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण यह विवाद पार्टी की छवि के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। इस मामले पर सफाई देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि इसे सरकार की नाकामी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे गलत काम और चोरियां पिछले लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार ने ही इन्हें पकड़ने और रोकने की हिम्मत दिखाई है।

​फिलहाल, अधूरी जांच रिपोर्ट और नेताओं के पास पुख्ता दस्तावेजों की कमी के कारण यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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