दिल्ली दंगा 2020: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 6 आरोपी बरी
दिल्ली दंगा 2020: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 6 आरोपी बरी
नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के युवा अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य मास्टरमाइंड और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कुल पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। करीब 6 साल के लंबे इंतजार के बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिला है।
अदालत ने ताहिर हुसैन और अन्य चार दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 147, 148 (दंगा भड़काना और घातक हथियारों से लैस होना), 153A (धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाना), 165 और 188 के तहत दोषी ठहराया है।
25 फरवरी 2020 की वो काली शाम: क्या हुआ था अंकित शर्मा के साथ?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग, खजूरी खास और मुस्तफाबाद जैसे इलाके हिंसा की आग में झुलस रहे थे।
इसी खौफनाक माहौल के बीच, आईबी में तैनात 26 वर्षीय अंकित शर्मा 25 फरवरी की शाम को अपने दफ्तर से घर लौटे थे। बाहर का तनावपूर्ण माहौल देखकर अंकित गली में हिंसक भीड़ को शांत कराने और लोगों को समझाने-बुझाने के उद्देश्य से बाहर निकले थे। जैसे ही वे चांद बाग पुलिया के पास पहुंचे, ताहिर हुसैन के घर और मस्जिद के पास सक्रिय हिंसक भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, भीड़ ‘हिंदू-हिंदू’ चिल्लाते हुए आगे बढ़ी। अंकित ने जान बचाने के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन दंगाई उन्हें बेरहमी से घसीटते हुए ताहिर हुसैन के घर के पास ले गए। वहां उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया गया और सबूत मिटाने के लिए उनकी लाश को खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया।
नाले से मिली लाश और पोस्टमार्टम की क्रूरता
26 फरवरी 2020 को अंकित के पिता रविंदर कुमार (जो खुद पुलिस विभाग में रहे हैं) ने दयालपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। स्थानीय लड़कों की सूचना पर जब पुलिस ने गोताखोरों की मदद से खजूरी खास नाले से अंकित का शव निकाला, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इंसानी क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं:
अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू और अन्य धारदार हथियारों के 51 गहरे घाव पाए गए थे।
फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार थे कि अत्यधिक खून बहने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी।
शव की पहचान मिटाने के लिए उसे नाले के कीचड़ में जानबूझकर धकेला गया था।
अदालत का फैसला: कौन हुआ दोषी और कौन हुआ बरी?
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ताहिर हुसैन को इस पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड घोषित किया था। जांच में ताहिर के घर से तेजाब की बोतलें, बड़े गुलेल और भारी मात्रा में पत्थर बरामद हुए थे।
इन 5 आरोपियों को कोर्ट ने ठहराया दोषी:
ताहिर हुसैन (पूर्व आप पार्षद और मुख्य साजिशकर्ता)
नजीम
कासिम
अनस
जावेद
इन 6 आरोपियों को अदालत ने किया बरी:
हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान
समीर खान
फिरोज
गुलफाम
शोएब आलम उर्फ बॉबी
मुंतजिम उर्फ मूसा
अदालत के भीतर कानूनी मोर्चेबंदी: दोनों पक्षों की दलीलें
अदालत के भीतर यह मामला लंबे समय तक कानूनी दांव-पेचों से गुजरा। सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया था कि यह एक युवा खुफिया अधिकारी की बर्बर हत्या का बेहद चौंकाने वाला मामला है।
अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) का तर्क: यह अचानक हुई कोई वारदात नहीं थी बल्कि बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाने की एक गहरी साजिश थी। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) साबित करते हैं कि सभी आरोपी ताहिर हुसैन के इशारे पर काम कर रहे थे और घटनास्थल पर मौजूद थे।
बचाव पक्ष (आरोपियों के वकील) का तर्क: बचाव पक्ष ने दलील दी कि ताहिर हुसैन को राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया गया है। वे खुद दंगों के वक्त जान बचा रहे थे और उन्होंने पुलिस को भी फोन किया था। पुलिस के पास ऐसा कोई सीधा वीडियो नहीं है जो यह दिखाए कि ताहिर या अन्य आरोपियों ने खुद अपने हाथों से चाकू मारा हो।
कोर्ट की वो तल्ख टिप्पणी जिसने तय की केस की दिशा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में एडिशनल सेशंस जज ने आरोप तय करते समय एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था:
”यह जरूरी नहीं है कि साजिश विशेष रूप से केवल अंकित शर्मा को ही मारने की रची गई हो। जब आरोपी व्यक्ति एक विशेष समुदाय को मारने के सामान्य उद्देश्य और साजिश के तहत काम कर रहे थे, तो उसमें अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल हो गई। अंकित को इसलिए मारा गया क्योंकि वह हिंदू थे और उस वक्त वहां अकेले पड़ गए थे।”
