उमर अब्दुल्ला की बढ़ीं मुश्किलें: बीजेपी ने भेजा 100 करोड़ का मानहानि नोटिस, रिश्वत के आरोपों पर 7 दिन में माफी की मांग
उमर अब्दुल्ला की बढ़ीं मुश्किलें: बीजेपी ने भेजा 100 करोड़ का मानहानि नोटिस, रिश्वत के आरोपों पर 7 दिन में माफी की मांग
जम्मू/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मोर्चा खोलते हुए 100 करोड़ रुपये के मानहानि के मुकदमे की चेतावनी दी है। भाजपा की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस पर वकील परिमोक्ष सेठ ने मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों को पूरी तरह झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताया है। उन्होंने साफ कहा कि यदि मुख्यमंत्री सात दिनों के भीतर अपनी टिप्पणी वापस लेकर लिखित माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ दीवानी और आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
यह कानूनी नोटिस भाजपा के जम्मू-कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद सतपाल शर्मा के माध्यम से भेजा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया था कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील ने उनकी पार्टी (नेशनल कॉन्फ्रेंस) के एक विधायक से संपर्क किया था। सीएम के मुताबिक, विधायक को 20 से 30 करोड़ रुपये की रिश्वत और मंत्री पद देने का लालच दिया गया था।
भाजपा का कहना है कि यह आरोप पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद यह खबर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुई, जिससे पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है।
भाजपा ने मांगे सबूत, ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
वकील परिमोक्ष सेठ ने बताया कि भाजपा इस मामले में पहले ही दो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुकी है। पहली 11 जुलाई की शाम को और दूसरी रविवार को नेता प्रतिपक्ष द्वारा की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री से आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे गए थे। लेकिन सीएम की ओर से अभी तक कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं। पार्टी के अनुसार, राज्य में 24 हजार नौकरियां कथित तौर पर आउटसोर्सिंग और बैकडोर (पीछे के दरवाजे) तरीके से दी गई हैं, और इन गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए भाजपा पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं।
7 दिन का अल्टीमेटम: कोर्ट जाने की तैयारी
कानूनी नोटिस में मुख्यमंत्री से सात दिनों के भीतर लिखित रूप से अपना बयान वापस लेने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में इस प्रकार के आरोप दोबारा न लगाने का आग्रह किया गया है।
वकील ने चेतावनी देते हुए कहा कि झूठे आरोप लगाकर कोई भी व्यक्ति जवाबदेही से बच नहीं सकता। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मुख्यमंत्री नोटिस का पालन नहीं करते हैं, तो भाजपा अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और 100 करोड़ रुपये की दीवानी मानहानि के साथ ही आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू करेगी।
