देहरादून में बवाल: पुलिस जवानों के 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर ‘अधिकार मार्च’, प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी झड़प
देहरादून में बवाल: पुलिस जवानों के 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर ‘अधिकार मार्च’, प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी झड़प
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस के जवानों का ग्रेड पे 4600 किए जाने की मांग अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तूल पकड़ने लगी है। इस मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने राजधानी देहरादून में एक विशाल ‘पुलिस अधिकार मार्च’ निकाला। परेड ग्राउंड से शुरू हुआ यह जुलूस जब पुलिस मुख्यालय की तरफ बढ़ा, तो भारी पुलिस बल ने बेरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
इस मार्च में आम आदमी पार्टी (AAP), उत्तराखंड क्रांति दल (UKD), कांग्रेस, मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति, जन अधिकार मंच और स्वाभिमान मोर्चा समेत कई प्रमुख संगठनों के कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए।
बैरिकेडिंग पर हंगामा और धक्का-मुक्की
परेड ग्राउंड के बाहर सड़क पर भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने जैसे ही पुलिस मुख्यालय की तरफ कूच किया, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगा दी। इससे नाराज होकर कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पर चढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को नीचे उतारा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ। काफी देर चले इस हंगमे के बाद जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।
खटीमा में अगले बड़े आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट संदीप चमोली ने सरकार पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2000 और 2001 में भर्ती हुए पुलिस कांस्टेबल पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी वे अपने न्यायसंगत अधिकारों से वंचित हैं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बावजूद आज तक पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड पे की जायज मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि यह मांग जल्द पूरी नहीं हुई, तो अगला उग्र प्रदर्शन अतिशीघ्र मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र खटीमा में किया जाएगा। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल सभी दलों और संगठनों के पदाधिकारियों ने पुलिस कर्मियों के समर्थन में ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
जानिए क्या है पुलिस ‘ग्रेड पे’ का पूरा विवाद?
उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों की भर्ती 2000 ग्रेड पे पर होती है। राज्य गठन के बाद पहली बार साल 2001 में सिपाहियों का पहला बैच भर्ती हुआ था। समय-समय पर बदले नियमों के कारण यह विवाद खड़ा हुआ है:
2001 का शुरुआती नियम: इसके तहत 8, 12 और 22 साल की सेवा पर ग्रेड पे बढ़ना था। इस नियम के अनुसार 8 साल पूरे होने पर सिपाहियों को 2400 ग्रेड पे मिला और 2013 में उन्हें 4600 ग्रेड पे मिलना तय था।
2013 का संसोधन: सरकार ने समय-सीमा बदलकर 10, 16 और 26 साल कर दी। इस बदलाव के कारण पहले बैच के सिपाहियों को 2017 में 4600 ग्रेड पे का लाभ मिलना तय हुआ था।
2016 (7वां वेतन आयोग): नए प्रावधानों के तहत प्रमोशन न होने पर ही अगले ग्रेड पे का भुगतान तय हुआ। साथ ही समय-सीमा को बढ़ाकर 10, 20 और 30 साल कर दिया गया। इसके अलावा 2400 और 4600 के बीच दो और स्लैब जोड़ दिए गए।
विवाद की मुख्य वजह: अप्रैल 2021 में उत्तराखंड पुलिस के पहले बैच (2001) के सिपाहियों की सेवा के 20 साल पूरे हो चुके हैं। नियमानुसार 20 साल पूरे होने पर अब वे 4600 ग्रेड पे की मांग कर रहे हैं, जो लंबे समय से अधर में लटकी हुई है। इसी असंतोष के कारण अब सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने पुलिस कर्मियों के हक में सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है।
