‘ऑपरेशन सिंदूर’ के 6 शहीद जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, दिल्ली के ‘त्याग चक्र’ में स्वर्ण अक्षरों में होंगे अंकित
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के 6 शहीद जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, दिल्ली के ‘त्याग चक्र’ में स्वर्ण अक्षरों में होंगे अंकित
नई दिल्ली: आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत सरकार ने इस ऑपरेशन के दौरान देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले 6 जांबाज भारतीय जवानों के नामों को आधिकारिक तौर पर पहली बार सार्वजनिक कर दिया है। इन वीर शहीदों में पांच थल सेना (Indian Army) के जवान और एक वायु सेना (Indian Air Force) के जांबाज शामिल हैं।
राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन वीर जवानों के नामों को मेमोरियल की आधिकारिक वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में दर्ज कर लिया गया है। इसके साथ ही, इनके नामों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक के ‘त्याग चक्र’ की दीवारों पर भी स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया जाएगा।
’ऑपरेशन सिंदूर’ के ये 6 वीर जवान हुए अमर:
लांस नायक दिनेश कुमार (5 फील्ड रेजिमेंट): पाकिस्तान की ओर से हुई भारी गोलाबारी के बीच अपने चार साथियों के साथ मोर्चे पर डटे रहे और जवाबी कार्रवाई करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
एविएटर मूड मुरलीनायक (851 लाइट रेजिमेंट): आंध्र प्रदेश के रहने वाले मुरलीनायक एलओसी (LoC) पर घुसपैठ रोकने की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद 9 मई को शहीद हुए।
सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (भारतीय वायु सेना): राजस्थान के रहने वाले सुरेंद्र वायु सेना में मेडिकल असिस्टेंट थे। उन्होंने पाकिस्तानी हमलों के बीच आर.एस. पुरा सेक्टर में अभूतपूर्व साहस दिखाते हुए मेडिकल सहायता पहुंचाई और 10 मई को गोलाबारी में शहीद हो गए।
सूबेदार पवन कुमार (10 इन्फैंट्री ब्रिगेड): हिमाचल प्रदेश के रहने वाले पवन कुमार की सेवानिवृत्ति (Retirement) में महज 2 महीने बचे थे। राजौरी में तैनाती के दौरान पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल होने के बाद 10 मई को उन्होंने अंतिम सांस ली।
राइफलमैन सुनील कुमार (जम्मू): दुश्मन के करीब आने पर भी सुनील अपनी पोस्ट के बंकर में आखिरी वक्त तक डटे रहे और देश की चौकी की रक्षा करते हुए 10 मई को वीरगति को प्राप्त हुए।
हवलदार सुनील कुमार सिंह (बिहार): बिहार के रहने वाले सुनील पाकिस्तानी ड्रोन गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे थे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी पोस्ट नहीं छोड़ी और 6 जून को शहीद हो गए।
जानिए क्या है ‘त्याग चक्र’ और इसकी खासियत?
’ऑपरेशन सिंदूर’ के वीरों के नाम जहां लिखे जाने हैं, उस ‘त्याग चक्र’ के बारे में जानना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है:
स्थान और महत्व: त्याग चक्र नई दिल्ली के इंडिया गेट परिसर में स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) के चार प्रमुख संकेंद्रित वृत्तों (Concentric Circles) में से एक है। यह आजादी के बाद देश की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले सशस्त्र बलों के शहीदों को समर्पित है।
चक्रव्यूह पैटर्न पर आधारित: त्याग चक्र की बनावट महाभारत के प्रसिद्ध ‘चक्रव्यूह’ के पैटर्न से प्रेरित है। यह संरचना सैनिकों के साहस और युद्ध के मैदान में उनकी रणनीतिक दृढ़ता को दर्शाती है।
25,000 से अधिक नाम: इसमें ग्रेनाइट पत्थरों से बनी 16 वृत्ताकार दीवारें हैं, जिन पर सोने के अक्षरों से 25,000 से अधिक शहीदों के नाम पहले से अंकित हैं। इसमें 1962 (भारत-चीन), 1965, 1971 और 1999 (करगिल युद्ध) के शहीदों के नाम शामिल हैं।
स्मारक के तीन अन्य चक्र भी हैं खास
राष्ट्रीय समर स्मारक में त्याग चक्र के अलावा तीन और चक्र हैं, जो हमारी सेना के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं:
अमर चक्र: यह मेमोरियल का सबसे केंद्रीय और आंतरिक चक्र है, जो शहीदों की अमरता का प्रतीक है। यहां 15.2 मीटर ऊंचा ग्रेनाइट का स्तंभ है, जिसके नीचे ‘अमर जवान ज्योति’ 24 घंटे लगातार जलती रहती है।
वीरता चक्र: यह दूसरा चक्र है, जिसे एक ढकी हुई गैलरी के रूप में बनाया गया है। इसकी दीवारों पर थल सेना, नौसेना और वायुसेना द्वारा लड़े गए 6 सबसे ऐतिहासिक और प्रसिद्ध युद्धों के दृश्यों को कांस्य (Bronze) भित्तिचित्रों के जरिए जीवंत किया गया है।
रक्षक चक्र: यह सबसे बाहरी चक्र है, जो देश की सीमाओं की अटूट सुरक्षा का प्रतीक है। इसे कतारबद्ध तरीके से लगाए गए 600 से अधिक घने पेड़ों से तैयार किया गया है। जिस तरह ये पेड़ स्मारक को घेरे हुए हैं, ठीक उसी तरह हमारे जवान देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तैनात रहते हैं।
